नारायण ने सुनी भक्तों की पुकार अब पशुबलि से इंकार।
मैखौली बिष्ट परिवारों के सामूहिक भंडारे में हुआ निर्णय।
सेना के आला अधिकारी रहे,परिवार के सदस्य भी चाहते थे बंद हो बलिप्रथा।
मेहलचौरी (गैरसैंण):-20 जून 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला.
कहते हैं भक्त अगर सच्चे मन से नारायण के सामने गुहार लगाए तो नारायण भी पिघल कर भक्तों की पुकार को स्वीकार कर लेते हैं। ऐसा ही वाक्या विकासखंड गैरसैंण के मेखौली गांव में आयोजित तीन दिवसीय भंडारे के दौरान देखने को मिला,जहां पौराणिक मान्यताओं को निभाने के दौरान बकरे की बलि दी जाने की प्रथा चली आ रही है,इसी दौरान कुछ भावुक हुए भक्तगणों ने देव पश्वाओं के समक्ष नतमस्तक होकर गुहार लगाते हुए कहा की एक तरफ मां भगवती तो सब जीवों की रक्षक है,ओर दूसरी तरफ निरीह पशुओं की बली को मान्यता क्यों। जिस पर मां भगवती के रूप में अवतरित देव पश्वा कुंदन सिंह बिष्ट ने कहा कि भक्तगण सच्चे मन से पूजा पाठ करें तो उनके लिए नारियल का चढ़ावा ही काफी है। उक्त वाक्य को देव आज्ञा मानते हुए सभी भक्तजनों ने भविष्य के अनुष्ठानों में मंदिर में बकरे की बली को बंद करने का निर्णय लिया।
उल्लेखनीय कि मैखौली के बिष्ट बाखली में गांव के 35 परिवारों द्वारा नवनिर्मित मां भगवती ओर नरसिंह देवता के मंदिर में मूर्ति स्थापना के अनुष्ठान के साथ ही तीन दिवसीय भंडारे का सामूहिक आयोजन किया गया था,इसी दौरान बकरे की बली की परंपरा को लेकर जब भक्तगणों ने मां के दरबार में गुहार लगाई तो मां ने अविलंब भक्तों की भावनाओं को समझते हुए,भविष्य में बगैर बलि के ही भंडारा आयोजित करने की अनुमति दे दी।
इसके बाद से ही गांव के इस मंदिर में निरीही प्राणीयों के बली प्रथा बंद होने को लेकर खुशी का माहौल है। मंदिर के दैवीय अनुष्ठान मुख्य पुजारी शास्त्री विपिन मंमगाई ,बृजमोहन लखेडा,देवजगरिया देव सिंह रावत द्वारा पूर्णाहुति यज्ञ के साथ समपन्न किये गये। देव पश्वाओं द्वारा भक्तगणों को सुख शांति का आशीर्वाद दिया गया।
जिसको लेकर बिष्ट परिवार के सदस्य व कोठा के जिला पंचायत सदस्य सुरेश कुमार बिष्ट ने कहा कि एक तरफ परंपराओं का पालन करना जरूरी है, तो वहीं दूसरी तरफ आधुनिक समाज में बलि प्रथा का विकल्प ढुंढने की भी आवश्यकता थी। बलि प्रथा को लेकर आयोजन में पंहुचे श्रद्धालुओं के मनोभावों को स्वीकार करते हुए मांं भगवती ने अब भविष्य में नारियल पूजा के साथ ही साथ समस्त अनुष्ठानों के आयोजन की अनुमति दे दी है।जो हम सभी के लिए एक प्रेरणादाई वाक्या बन गया है।
इस अवसर पर जगमोहन कठैत ,बलवीर कुंवर ,शिक्षक प्रेम सिंह बिष्ट,सूबेदार मान सिंह बिष्ट,बलवंत सिंह बिष्ट, सुरेंद्र सिंह बिष्ट,वीरेंद्र सिंह बिष्ट,प्रताप सिंह बिष्ट,ध्यान सिंह बिष्ट,खीम सिंह बिष्ट,कुंदन सिंह बिष्ट,प्रेम सिंह बिष्ट सहित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सूबेदार जय सिंह बिष्ट के परिजनों में शामिल सेवानिवृत कर्नल सुदर्शन बिष्ट,कर्नल जसवंत सिंह बिष्ट,जगदर्शन सिंह बिष्ट, मेजर जनरल दिनेश बिष्ट सहित बड़ी संख्या में नजदीकी गांवों के ग्रामीण शामिल रहे।
