उत्तराखंड में छह महीने के लिए लागू हुआ एस्मा,सरकारी कर्मचारी नहीं कर सकेंगे कोई भी हड़ताल !!

उत्तराखंड में छह महीने के लिए लागू हुआ एस्मा,सरकारी कर्मचारी नहीं कर सकेंगे कोई भी हड़ताल !!

देहरादून:-30 जुलाई 2026

उत्तराखंड में अगले 6 माह के लिए हड़ताल पर पाबंदी लगाई गई है। सरकार ने राज्य कर्मचारियों और विभागों के अंतर्गत काम करने वाले कर्मियों के लिए आदेश जारी किया गया है। शासन ने कर्मचारियों की हड़ताल पर रोक के आदेश किए हैं। जिसके बाद अब प्रदेश में कर्मचारी अगले 6 महीनों तक हड़ताल नहीं कर पाएंगे।

उत्तराखंड सरकार ने राज्य में आवश्यक सेवाओं के निर्बाध संचालन को बनाए रखने के लिए बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। सरकार ने राज्याधीन सेवाओं में अगले छह माह तक हड़ताल पर रोक लगाने का फैसला करते हुए अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। इस संबंध में कार्मिक विभाग की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है और आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

कार्मिक विभाग के सचिव शैलेश बगौली द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, उत्तर प्रदेश अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम, जो उत्तराखंड राज्य में यथावत लागू है, उसके प्रावधानों के तहत यह निर्णय लिया गया है। अधिसूचना जारी होने की तिथि से आगामी छह माह तक राज्याधीन सेवाओं में किसी भी प्रकार की हड़ताल प्रतिबंधित रहेगी। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य जनहित से जुड़ी सेवाओं को बिना किसी व्यवधान के जारी रखना और आम नागरिकों को असुविधा से बचाना है।

प्रदेश में विभिन्न कर्मचारी संगठन अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि यदि ऐसे आंदोलनों के कारण हड़ताल होती है तो स्वास्थ्य, प्रशासन, परिवहन और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं,जिसका सीधा असर आम जनता के दैनिक जीवन पर पड़ेगा। इसी संभावना को देखते हुए सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए एस्मा लागू करने का निर्णय लिया है।

जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्याधीन सेवाओं में कार्यरत कर्मचारी अगले छह माह तक हड़ताल नहीं कर सकेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है और इसका पालन संबंधित सभी विभागों एवं कर्मचारियों के लिए अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि आवश्यक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसी उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है, ताकि किसी भी परिस्थिति में जनसुविधाओं पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

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