नैनीताल के गांवों में दूषित पानी ने मचाया हड़कंप,दो लोगों की मौत।
नैनीताल:-07 सितंबर 2026
उत्तराखण्ड में नैनीताल से जुड़े गांव में दूषित पानी पीने से दो लोगों की मौत हो गई है।इस दुःखद घटना के बाद ग्रामीणों में रोष है और उन्होंने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। नैनीताल जिले के वीरभट्टी, गांजा, छिंडां मल्ला, बगरीखोड़, छिंडां तल्ला आदि गांव के 50 प्रतिशत लोग दूषित पेयजल से जुड़ी बीमारियों के शिकार हुए हैं।
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल से जुड़ी बीमारियों ने अब गंभीर चिंता पैदा कर दी है। पिछले कुछ समय से इलाके में उल्टी-दस्त, डायरिया और टाइफाइड के मामले सामने आ रहे थे, लेकिन अब पीलिया और लिवर संक्रमण के गंभीर मामलों ने स्थिति को और चिंताजनक बना दिया है। स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती संक्रमण को फैलने से रोकना है। क्षेत्र के करीब आठ गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं और लगातार बढ़ रहे मरीजों के बीच दो लोगों की उपचार के दौरान मौत हो चुकी है।
ज्योलीकोट के सड़ियाताल निवासी 16 वर्षीय रितेश जीना की तबीयत अगस्त में खराब हुई थी। परिजनों के मुताबिक, उसे उल्टी-दस्त और पीलिया की शिकायत के बाद पहले हल्द्वानी में उपचार दिलाया गया। हालत बिगड़ने पर उसे दिल्ली के अस्पतालों में ले जाया गया, जहां लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत बताई गई। परिवार के लिए करीब एक करोड़ रुपये की व्यवस्था करना संभव नहीं हो सका। बाद में रितेश को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। रितेश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था।
इसी बीच ज्योलीकोट निवासी 26 वर्षीय नीमा जोशी की भी पीलिया और लिवर संक्रमण के चलते जान चली गई। परिजनों के अनुसार, तबीयत बिगड़ने पर उन्हें हल्द्वानी के निजी अस्पताल में दिखाया गया था। हालत गंभीर होने पर बरेली के राममूर्ति अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। नीमा अपने पीछे पति और दो छोटी बेटियों को छोड़ गई हैं। परिवार के पांच अन्य सदस्यों के भी पीलिया से संक्रमित होने की जानकारी सामने आई है।
ज्योलीकोट में बिगड़े स्वास्थ्य हालात का असर नैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल में भी दिखाई दे रहा है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार रोजाना करीब 20 से 25 मरीज पीलिया और पेट संबंधी संक्रमण की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें गंभीर स्थिति वाले लगभग 5 से 6 मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। अस्पताल में भर्ती पीलिया मरीजों में करीब 90 प्रतिशत मरीज ज्योलीकोट और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बताए जा रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। क्षेत्र में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित की गई है। स्वास्थ्य टीमें गांवों में मेडिकल कैंप लगाकर लोगों की जांच कर रही हैं और जरूरत के अनुसार मरीजों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। छीड़ा-वीरभट्टी में लगाए गए स्वास्थ्य शिविर में 17 लोगों और ज्योलीकोट कैंप में 9 लोगों की जांच की गई, जबकि ज्योलीकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 43 मरीज जांच और उपचार के लिए पहुंचे।
बीमारियों के संभावित जलजनित प्रसार को देखते हुए पेयजल व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रभावित गांवों की पेयजल टंकियों की सफाई और क्लोरीनेशन का काम तेज कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर सर्वे के साथ लोगों को ओआरएस उपलब्ध करा रही हैं और संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बता रही हैं। डॉक्टरों ने लोगों को विशेष रूप से पानी उबालकर पीने की सलाह दी है।
ज्योलीकोट और आसपास के गांवों में लंबे समय से सामने आ रहे जलजनित बीमारी के मामलों ने पेयजल की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का पूरा ध्यान संक्रमण की स्थिति पर निगरानी रखने, नए मरीजों की पहचान करने और पेयजल व्यवस्था को सुरक्षित बनाने पर है। दो लोगों की मौत के बाद क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है, ऐसे में लोगों से सावधानी बरतने और किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की जा रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि ज्यूलिकोट के साथ वर्गोंमोंट, गांजा, छीड़ा, वीरभट्टी, कृष्णापुर, साडियाताल, तल्ला बेलुवाखान, मल्ला बेलुवाखान, देवलडूंगा आदि क्षेत्रों में भी दूषित पेयजल आपूर्ति से ये पेट संबंधी बीमारियां पैदा हो रही हैं।
दूषित पानी से पीलिया,टाइफाइड,डायरिया,उल्टी,बुखार,दस्त जैसी बीमारियां हो रही हैं। उन्होंने प्रशासन और जल संस्थान पर लापरवाही समेत कई गंभीर आरोप लगाए है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी नैनीताल से संबंधित विभाग के अधिकरियों पर कार्यवाही करने की मांग भी की है।
