चमोली जनपद के सकंड गांव में सड़क नहीं बनी तो ग्रामीणों ने खुद संभाला मोर्चा,पूजा के बाद शुरू किया सड़क निर्माण।

चमोली जनपद के सकंड गांव में सड़क नहीं बनी तो ग्रामीणों ने खुद संभाला मोर्चा,पूजा के बाद शुरू किया सड़क निर्माण।

कर्णप्रयाग (चमोली):-12 सितंबर 2026

चमोली जनपद के विकासखंड कर्णप्रयाग के सकंड गांव में सड़क सुविधा की मांग अब ग्रामीणों के लिए इंतजार का विषय नहीं रही है। वर्षों से सड़क की बाट जोह रहे ग्रामीणों ने शुक्रवार सुबह पूजा-अर्चना के बाद खुद ही सड़क खोलने का काम शुरू कर दिया है। गैंती, फावड़ा और शब्बल लेकर ग्रामीण सामूहिक रूप से सड़क निर्माण में जुट गए।

वर्षों के इंतजार के बाद लिया सामूहिक फैसला

सकंड गांव के ग्रामीणों का कहना है कि गांव के लिए सड़क की मांग लंबे समय से उठाई जाती रही है। अधिकारियों और संबंधित विभागों के स्तर पर लगातार प्रयास और आश्वासन मिलने के बावजूद जमीनी स्तर पर सड़क सुविधा का लाभ नहीं मिल सका। आखिरकार ग्रामीणों ने श्रमदान के जरिए अपने स्तर पर रास्ता तैयार करने का निर्णय लिया।शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने पहले विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद सभी लोग आवश्यक औजार लेकर सड़क खोलने के काम में जुट गए। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहल उनकी मजबूरी के साथ-साथ गांव को सड़क से जोड़ने की दृढ़ इच्छा को भी दर्शाती है।

सड़क के अभाव में लगातार घटती गई गांव की आबादी

ग्रामीणों के मुताबिक सड़क सुविधा नहीं होने का सीधा असर गांव की आबादी पर पड़ा है। कभी सकंड गांव में करीब 40 परिवार रहते थे,लेकिन आवागमन की परेशानी और मूलभूत सुविधाओं की कमी के चलते धीरे-धीरे कई परिवार गांव से बाहर चले गए। वर्तमान में गांव में लगभग 12 परिवार ही रह गए हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि गांव तक सड़क पहुंचती तो पलायन की स्थिति काफी हद तक रोकी जा सकती थी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार तथा शिक्षा जैसी सुविधाओं तक पहुंच भी आसान होती।

अंतिम सर्वे के बाद भी सड़क का इंतजार

ग्रामीणों के अनुसार गांव के नजदीक सड़क को लेकर अंतिम सर्वे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी निर्माण कार्य धरातल पर आगे नहीं बढ़ सका। लंबे समय तक सरकारी प्रक्रिया और निर्माण की उम्मीद में इंतजार करने के बाद ग्रामीणों ने अब स्वयं पहल करने का फैसला किया है। श्रमदान से शुरू किए गए इस अभियान में गांव के लोग अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि गांव की वर्षों पुरानी सड़क समस्या की ओर जिम्मेदार विभागों का ध्यान खींचना है।

ग्रामीणों की पहल ने खड़े किए कई सवाल

सकंड गांव में ग्रामीणों द्वारा खुद सड़क बनाने की शुरुआत ने पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि गांव में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और अन्य जरूरी सेवाओं की पहुंच का आधार भी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी इस पहल के बाद संबंधित विभाग जल्द मामले का संज्ञान लेंगे और गांव को स्थायी सड़क सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कार्रवाई होगी।

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