लाटूधाम वाण में नंदा देव ड़ोलियों और छंतोलियों का अद्भुत समागम।
चमोली:-16 सितंबर 2026
रिपोर्ट-रजपाल बिष्ट
मां नंदा की बड़ी जात तथा बधाण की लोकजात में शामिल उत्सव ड़ोलियों और छंतोलियों की लाटूधाम वाण में आमद से अद्भुत समागम देखने को मिला। इसके चलते मां नंदा अपने धर्म भाई लाटू देवता से मिली तो तमाम लोगों की आखें छलछला उठी।
बीते 5 सितंबर को नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से चली नंदा की बड़ी जात में शामिल दशोली तथा बंड की उत्सव ड़ोलियां और छंतोलियां तथा बधाण की राजराजेश्वरी की उत्सव डोली श्रद्धालुओं के हुजूम के साथ अपने धर्म भाई लाटू देवता से मिली तो वाण गांव में देव ड़ोलियों और छंतोलियों का अद्भुत समागम देखने को मिला। इसके चलते यात्रा का आबादी वाला अंतिम लाटूधाम पड़ाव मां नंदा के आस्था के सैलाब में डूब पड़ा। इसके चलते वाण गांव में श्रद्धालुओं के भारी आमद के चलते खासी चहल-पहल तो लौटी ही अपितु पिछले 12 वर्षो से पसरा सन्नाटा भी टूट गया।
मां नंदा धर्म भाई लाटू देवता से मिली तो लोगों की आंखें छलछला उठी।
नंदा की बड़ी जात में शामिल दशोली तथा बंड की देव ड़ोलियां और छंतोलियों की कनोल गांव में पूजा अर्चना के पश्चात कैलास के लिए विदाई दी गई। देव ड़ोलियों और छंतोलियों के संग तमाम श्रद्धालु भी नंदा की जयकारों के साथ वाण गांव पहुंचे। इसी दौरान बधाण की राजराजेश्वरी की उत्सव डोली भी मुंदोली से लोहाजंग होते हुए वाण गांव पहुंची तो वाण गांव में देव ड़ोलियों और छंतोलियों का अद्भुत समागम देखने को मिला। नंदा के धर्म भाई लाटू ही वाण से आगे की यात्रा का पथ-प्रदर्शक माने जाते हैं। अब लाटू देवता के नेतृत्व में ही नंदा जात यात्रा निर्जन पड़ावों अथवा कैलास को रवाना होगी। बुधवार को नंदा की देव ड़ोलियों और छंतोलियों के मां नंदा के धर्म भाई लाटू से मिलन के पल को देख तमाम लोगों की आखें छलछला उठी।
वाण गांव में ग्रामीणों नें पौराणिक लोकगीतों और जागरों तथा पुष्पवर्षा के साथ देव़ ड़ोलियों की आगवानी की। वाण में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। वाण गांव में बड़ी जात तथा लोकजात में शामिल देव ड़ोलियों तथा छँतोलियों ने लाटू देवता के मंदिर में रात्रि विश्राम के लिए अपना डेरा जमा लिया है। बड़ी जात में शामिल कई श्रद्धालु तो बुधवार को ही गैरोलीपातल और वेदनी बुग्याल में डे़रा जमा गए हैं। इससे पूर्व मुंदोली में मां नंदा राजराजेश्वरी की विदाई भी भावपूर्ण माहौल में हुई। मां नंदा ने अपने भाई बाला द्यौसिंह देवता के जन्मस्थान मुन्दोली से विदाई ली तो लोग भावुक हो उठे। इस दौरान लोगों ने मां नंदा से सुख समृद्धि की मनौती मांगी।
द्यौसिंह देवता से दुर्गम कैलाश यात्रा के आगे के पथ प्रदर्शन और मार्ग की अगवानी के लिए साथ चलने का छोटा सा आग्रह के पश्चात यात्रा आगे के पड़ाव को बड़ी। परंपरा के अनुसार, द्यौसिंह देवता और लाटू देवता की मौजूदगी के बिना कैलाश मार्ग की कठिन यात्रा को सुगम नहीं माना जाता। यह यात्रा लोक संस्कृति, भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और अटूट आस्था की मिसाल बनकर आगे बढ़ रही है।
