मां नंदा बड़ी जात को निर्जन पड़ावों का अब चुनौती भरा सफर।

मां नंदा बड़ी जात को निर्जन पड़ावों का अब चुनौती भरा सफर।

चमोली:-16 सितंबर 2026
रिपोर्ट-रजपाल बिष्ट

हिमालय की अधिष्ठात्री देवी मां नंदा की बड़ी जात को निर्जन पड़ावों का चुनौती भरा सफर अब गुरूवार से शुरू होनें जा रहा है। इसके चलते अब बड़ी जात के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्र के निर्जन पड़ावों की डगर किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं रहेगी।

दरअसल आबादी वाले अंतिम गांव वाण में नंदा की बड़ी जात तथा लोकजात के मिलन के साथ अब गुरूवार से नंदा जात उच्च हिमालय के पड़ावों को रवाना होगी। इसके तहत बड़ी जात में शामिल दशोली तथा बंड की नंदा की उत्सव डोलियां और तमाम इलाकों की छंतोलियां उच्च हिमालय में स्थित होमकुंड तक जाएंगी। बधाण की राजराजेश्वरी की उत्सव डोली बेदनी से ही वापस लौट आएगी। यानी नंदा की बड़ी जात में शामिल श्रद्धालुओं को इस बार पैदल रास्तों के व्यवस्थित न होने के कारण मुश्किलों के बीच यात्रा करनी होगी। वैसे भी उच्च हिमालय के क्षेत्रों आवाजाही न होने के चलते पैदल रास्ते भी सुरक्षित नहीं हैं। हालांकि 2014 की नंदा राजजात में होमकुंड तक पैदल रास्ते को व्यवस्थित कर लिया गया था। इसके बावजूद 12 साल बाद बड़ी जात निकलनें जा रही है तो रास्ते आवाजाही के लिए मुफीद नहीं है। चमोली जिला प्रशासन द्वारा भेजी गई एंडवास टीम ने होमकुंड पहुंचकर स्थिति का जायजा लेते हुए रास्तों के लिए आवाजाही के सुरक्षित नहीं बताया है।

वाण से गैरोलीपातल, बेदनी बुग्याल, पातरनचैणियां, रूपकुंड, ज्यूंरागली, शिलासमुद्र, होते हुए बड़ी जात होमकुंड तक जाएगी। हालाकि वाण से बेदनी कुंड तक की आवाजाही को सुरक्षित बताया जा रहा है। इसके बावजूद बेदनी बुग्याल से होमकुंड तक की यात्रा कठिन तो है ही अपितु चुनौतीपूर्ण भी। वाण से गैरोलीपातल 10 किमी की दूरी पर स्थित है। गैरोलीपातल से बेदनी बुग्याल की पैदल दूरी 3 किमी ही है। बेदनी से पातरनचैणियां , की दूरी 6 किमी तथा पातरनचैणियां से रूपकुंड 7 किमी की दूरी पर स्थित है। रूपकुंड से शिलासमुद्र की दूरी 15 किमी है। शिलासमुद्र से होमकुंड की दूरी वैसे 16 किमी ही है। इस बार ग्लेशियर से पट जाने के कारण श्रद्धालुओं को अप एंड डाउन के चलते करीब 30 किमी की पैदल दूरी पार कर होमकुंड पहुंचना होगा। होमकुंड तक पहुंचना इस बार पहले की तरह आसान भी नहीं है। 1988, 2000 तथा 2014 की जात में उच्च हिमालय के निर्जन पड़ावों तक पहुंचने के लिए पैदल मार्गो को व्यवस्थित कर दिया जाता था। इस बार पैदल रास्तों को व्यवस्थित नहीं किया जा सका है।

नंदा देवी राजजात के 2027 में होने और इसी बीच नंदा की बड़ी जात को इसी साल आयोजित करने को लेकर चले संशय के बीच निर्जन पड़ाव वाले क्षेत्रों और डेंजर जोन को आवाजाही के लिए व्यवस्थित नहीं किया जा सका। इसके चलते अब निर्जन पड़ावों के लिए आवाजाही की व्यवस्था बनाना किसी चुनौती से कम नहीं है। खासकर शिलासमुद्र से होमकुंड तक की आवाजाही को सुरक्षित व निरापद होने की चुनौती बनी हुई है। ग्लेशियर खिसकने के कारण यात्रियों को इस बार दुगनी दूरी तक करने पड़ेगी।इसी तरह होमकुंड से वापसी चंदनियाघट होते हुए आबादी वाले पड़ाव सुतोल होगी। होमकुंड से सुतोल की दूरी 27 किमी करीब होने के चलते वापसी की राह भी आसान नहीं है। वर्ष 2000 की नंदा राजजात में श्रद्धालुओं को होमकुंड से सुतोल की वापसी जान हथेली पर रखकर करनी पड़ी थी। इस बार भी डगर आसान नहीं है। हालांकि श्रद्धालुओं की सीमित संख्या को लेकर पर्यटन विभाग की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है। इसके बावजूद श्रद्धालु होमकुंड तक की यात्रा को लेकर उत्साह से लबरेज हैं। हालात बता रहे हैं कि बुधवार को जब देव ड़ोलियों, छंतोलियों तथा श्रद्धालुओं का आबादी वाले अंतिम पड़ाव वाण में है तो इससे पूर्व ही तमाम श्रद्धालु गैरोलीपातल और बेदनी बुग्याल जैसे निर्जन पड़ावों पर डेरा जमा दिए हैं। इस तरह बड़ी जात में शामिल श्रद्धालुओं को उच्च हिमालय में स्थित निर्जन पड़ावों के रास्तों पर संभलकर चलना होगा। इसमें ही बड़ी जात की सुरक्षित सलामती हो सकेगी। कहा जा सकता है कि अब मां नंदा के रहमोकरम पर ही नंदा की बड़ी जात की सुरक्षित वापसी होगी।

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