औली की वादियों में युद्धाभ्यास को पसीना बहा रहे भारत और अमेरिकी सैनिक।

औली की वादियों में युद्धाभ्यास को पसीना बहा रहे भारत और अमेरिकी सैनिक।

औली (चमोली):-17 सितंबर 2026
रिपोर्ट-रजपाल बिष्ट.

उत्तराखंड के सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमांत जोशीमठ नगर के औली में भारत तथा अमेरिका की सेनाओं के मध्य सयुक्त सैन्य अभ्यास में सैनिक खूब पसीना बहा रहे है.दरअसल औली में भारत और अमेरिका की सेनाओं के मध्य सयुक्त सैन्य अभ्यास युद्ध-2026 के 22 वें संस्करण के तहत युद्धाभ्यास चल रहा है।

औली के प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित युद्धाभ्यास दोनों देशों के 1200 सैन्य कर्मी प्रतिभाग कर रहे हैं। इसके तहत यह अभ्यास उत्तराखंड के औली तथा राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में संचालित हो रहा है। इससे पूर्व भारतीय सेना की 14 वी इन्फैंट्री डिविजन के जनरल आफिसर कमांडिग मेजर जनरल अमरेश गुंजन तथा अमेरिकी सेना की 11 वी एयरबोर्न डिविजन की पहली इन्फैंट्री ब्रिगेड काॅम्बैट टीम के कमांडर कर्नल बेंजामिन जैकमैंन ने किया।

बताया गया कि युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय और अर्द्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में एकीकृत युद्ध समूहों के इस्तेमाल को लेकर दोनों सेनाओं की संयुक्त सैन्य क्षमता को मजबूत करना है। अभ्यास में पैदल सेना आधारित अभियानों पर खास जोर दिया जा रहा है। इसके तहत दोनों सेनाएं कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में संयुक्त योजना, अभियान संचालन और युद्ध कौशल का अभ्यास कर रही है। औली की ऊंचाई और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियां अमेरिकी सैनिकों के लिए खास प्रशिक्षण का अवसर मिल रहा है। भारतीय सेना को अमेरिकी सेना की आधुनिक युद्ध तकनीक, संचालन पद्धति तथा सामरिक अनुभवों से सीखने का अवसर मिलने जा रहा है। युद्धाभ्यास में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल प्रमुख आकर्षण रहेगा। प्रशिक्षण के दौरान निगरानी और टोही अभियानों के लिए ड्रोंन तथा स्वायत प्रणालियों का उपयोग किया जा रहा है। इससे दोनों सेनाओं के जवानों को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में आधुनिक तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल का अनुभव हासिल होगा।

राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का भी प्रदर्शन होगा। दोनों सेनाओं के विशेषज्ञ उभरती सैन्य तकनीकी और बहु क्षेत्रीय युद्ध में तेजी से हो रहे बदलावों को लेकर अनुभव साझा करेंगे। युद्धाभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के लिए मात्र सयुक्त सैन्य प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं रहेगा। इस दौरान रणनीति,तकनीक तथा संचालन की प्रक्रियाओं को साझा करने के साथ ही विभिन्न भू-भागों और अलग-अलग परिचालन परिस्थितियों में संयुक्त अभियान संचालित करने की क्षमता को सुदृढ़ किया जाएगा। औली में पहाड़ी युद्ध प्रशिक्षण तथा महाजन में फील्ड फायरिंग के जरिए दोनों सेनाएं अलग-अलग युद्ध परिस्थितियों में अपनी तैयारियों को परखेंगी। इस तरह औली में दोनों सेनाओं की मौजूदगी के चलते युद्धाभ्यास का प्रशिक्षण महत्वपूर्ण संदेश देने जा रहा है।

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