चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद, गोपेश्वर गद्दीस्थल के लिए कल रवाना होगी उत्सव डोली।

चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद, गोपेश्वर गद्दीस्थल के लिए कल रवाना होगी उत्सव डोली।

अगले 6 महीनों तक गोपेश्वर में होंगे चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के दर्शन।

चमोली:- 17 अक्टूबर 2026

पंचकेदारों में से एक चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट आज शनिवार को शाम 7:45 बजे शीतकाल के लिए विधि-विधान और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ बंद कर दिए गए हैं। कपाट बंद होने के शुभ अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु इस पावन और भावुक पल के साक्षी बने। कपाट बंद होने के साथ ही रुद्रनाथ मंदिर परिसर भगवान रुद्रनाथ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। अब आगामी छह महीनों तक भगवान रुद्रनाथ के दर्शन उनके शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर में होंगे।

पौराणिक परंपरा के अनुसार, कपाट बंद होने की प्रक्रिया आज दोपहर से ही शुरू हो गई थी। मुख्य पुजारी द्वारा भगवान रुद्रनाथ के विग्रह की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद, स्वयंभू शिवलिंग को स्थानीय ब्रह्मकमलों, पुष्पों और भस्म से ढककर समाधि रूप दिया गया। आज शाम ठीक 7:45 बजे जैसे ही मुख्य गर्भगृह के कपाट बंद हुए, वहां मौजूद श्रद्धालुओं और हक-हकूकधारियों की आंखें नम हो गईं। शीतकाल के दौरान ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण इस पावन धाम की यात्रा स्थगित रहती है। कपाट बंद होने के बाद,भगवान रुद्रनाथ की भव्य उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल, गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर के लिए कल यानी रविवार 18 अक्टूबर को सुबह प्रस्थान करेगी। भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली विभिन्न पड़ावों से होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचेगी,18 अक्टूबर रविवार को डोली रुद्रनाथ धाम से प्रस्थान कर अपनी यात्रा के पहले पड़ाव पनार पहुंचेगी उसके बाद पितृधार,ल्यूंठी होते हुए जवाल्पा देवी मंदिर देवलधार में रात्रि विश्राम करेगी।

अगले 6 महीनों तक गोपेश्वर में होंगे चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के दर्शन।

19 अक्टूबर सोमवार को उत्सव डोली भक्तों को आशीर्वाद देते हुए गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी।19 अक्टूबर को गोपीनाथ मंदिर के गर्भगृह में भगवान रुद्रनाथ की डोली को धार्मिक परंपराओं के साथ स्थापित कर दिया जाएगा। इसके बाद देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अगले छह महीनों तक भगवान रुद्रनाथ के अलौकिक मुखारविंद के दर्शन और पूजा-अर्चना गोपेश्वर में ही कर सकेंगे। मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने डोली यात्रा के मार्गों और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

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