उत्तरांचल यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में मिले 20 फर्जी शिक्षक,राष्ट्रीय आयोग ने रद्द की मान्यता,1 करोड़ का जुर्माना ठोका।

उत्तरांचल यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में मिले 20 फर्जी शिक्षक,राष्ट्रीय आयोग ने रद्द की मान्यता,1 करोड़ का जुर्माना ठोका।

हरिद्वार:-25 अक्टूबर 2026।

उत्तराखंड में मेडिकल शिक्षा के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े और धांधली के खिलाफ भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। हरिद्वार के पदार्था स्थित राज्य के इकलौते ‘उत्तरांचल यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल’ में 20 फर्जी शिक्षक मिलने और सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ उजागर होने पर आयोग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए संस्थान की मान्यता रद्द कर दी है। इसके साथ ही कॉलेज प्रबंधन पर 1 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना भी ठोका गया है।

उत्तराखंड के इस एकमात्र यूनानी संस्थान में लंबे समय से मानकों को ताक पर रखकर व्यवस्थाएं चलाई जा रही थीं। जून महीने में जब ‘मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड’ की विशेष जांच टीम ने कॉलेज में औचक छापेमारी की, तो चौंकने वाली हकीकत सामने आई। कॉलेज के रिकॉर्ड में 20 ऐसे प्रोफेसरों और शिक्षकों के नाम दर्ज थे, जो वास्तव में वहाँ मौजूद ही नहीं थे और केवल कागजों पर फैकल्टी का खेल चल रहा था।

इसके अलावा, शिक्षकों की आधार-लिंक्ड बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली में भी भारी हेरफेर पाया गया। जब जांच टीम ने हाजिरी का भौतिक प्रमाण मांगा, तो कॉलेज प्रशासन ने सच्चाई छुपाने के लिए एडिटेड और लूपिंग वाले फर्जी सीसीटीवी वीडियो सौंप दिए, जिसे तकनीकी जांच में पकड़ लिया गया।

राष्ट्रीय आयोग ने प्रति फर्जी शिक्षक 5 प्रतिशत सीट कटौती के नियम का सख्ती से पालन करते हुए कॉलेज की सभी 60 बीयूएमएस (BUMS) सीटों पर नए सत्र के लिए एडमिशन की प्रक्रिया को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। आयोग का स्पष्ट मानना है कि बिना शिक्षकों के फर्जी तरीके से तैयार किए जा रहे डॉक्टर समाज और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा हैं। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. शिवकुमार बरनवाल ने भी राष्ट्रीय आयोग द्वारा जारी इस सख्त आदेश और मान्यता रद्द किए जाने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। इस कठोर कार्रवाई के बाद उत्तराखंड के आयुष, आयुर्वेद और यूनानी मेडिकल कॉलेजों के संचालकों में हड़कंप मच गया है। जहाँ एक ओर शिक्षाविदों द्वारा आयोग के इस कदम को मेडिकल शिक्षा की गिरती गुणवत्ता को सुधारने के लिए बेहद जरूरी और सराहनीय बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इस सत्र में यूनानी चिकित्सा पद्धति (BUMS) में दाखिले का सपना देख रहे सैकड़ों युवाओं के सामने गहरा संकट खड़ा हो गया है। सूत्रों के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाले अन्य निजी संस्थानों पर भी आने वाले दिनों में ऐसी ही सख्त कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

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