ग्राम पंचायतों के अधिकारों पर कैंची चलने से आक्रोश: 27 अक्टूबर को विधानसभा का घेराव करेगा प्रदेश प्रधान संगठन।
गैरसैंण:- 24 अक्टूबर 2026
रिपोर्ट-पुष्कर सिंह रावत
उत्तराखंड में ग्राम पंचायतों के अधिकारों में कटौती और लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार के उदासीन रवैये के खिलाफ प्रदेश के ग्राम प्रधानों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। प्रदेश प्रधान संगठन उत्तराखंड द्वारा आगामी 27 अक्टूबर को विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा घेराव कार्यक्रम की घोषणा की गई है। इस आंदोलन में राज्य के सभी जिलों और ब्लॉकों से हजारों की संख्या में ग्राम प्रधान और संगठन के पदाधिकारी शामिल होंगे।
प्रधान संगठन के गैरसैंण ब्लॉक अध्यक्ष मनोज नेगी ने जानकारी देते हुए बताया कि,प्रधान संगठन अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहा है। इससे पूर्व देहरादून में किए गए सचिवालय कूच के दौरान सरकार ने मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी फाइलें शासन स्तर पर ही विचाराधीन हैं.सरकार की इस कथित लेटलतीफी और टालमटोल की नीति से प्रदेशभर के ग्राम प्रधानों में भारी नाराजगी व्याप्त है।इस बार आंदोलन का सबसे बड़ा कारण ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों को सीमित करना है।
प्रधान संगठन गैरसैंण के ब्लॉक अध्यक्ष मनोज नेगी ने बताया कि सरकार द्वारा नए पंचायत भवनों के निर्माण,उनके पुनर्निर्माण तथा सुधारीकरण के कार्यों को ग्राम पंचायतों से छीनकर अन्य सरकारी कार्यदायी संस्थाओं को सौंपने का तुगलकी फरमान जारी किया गया है। प्रधानों का आरोप है कि यह सीधे तौर पर पंचायती राज व्यवस्था को कमजोर करने और लोकतांत्रिक अधिकारों पर कैंची चलाने का प्रयास है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आंदोलन को सफल बनाने के लिए संगठन ने अपनी पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है 27 अक्टूबर को सुबह ठीक 11 बजे प्रदेश के सभी प्रधान, ब्लॉक व जिला अध्यक्ष और प्रांतीय पदाधिकारी गैरसैंण स्थित क्रीड़ा मैदान में एकत्रित होंगे। इस दौरान क्रीड़ा मैदान में एक संक्षिप्त सभा के बाद सभी क्षेत्रों से आए प्रधान एकजुट होकर रैली के रूप में आगे बढ़ेंगे.दोपहर 1 बजे क्रीड़ा मैदान से विधानसभा भराड़ीसैंण की ओर विशाल हुजूम के साथ कूच किया जाएगा।
संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि यदि 27 अक्टूबर के घेराव के बाद भी सरकार ने ग्राम पंचायतों के अधिकारों को बहाल नहीं किया और 10 सूत्रीय मांगों पर तत्काल शासनादेश जारी नहीं किया,तो उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी।
