देहरादून में प्राथमिक शिक्षकों का सैलाब: 9 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास कूच,बैरिकेडिंग पर पुलिस से तीखी नोकझोंक।
देहरादून:- 24 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षकों का गुस्सा आज राजधानी की सड़कों पर फूट पड़ा। अपनी 9 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर प्रदेशभर से आए हजारों प्राथमिक शिक्षकों ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास कूच किया। परेड ग्राउंड से शुरू हुई इस विशाल आक्रोश रैली के कारण देहरादून के मुख्य मार्गों पर घंटों तक यातायात रेंगता रहा। न्यू कैंट रोड पर पुलिस द्वारा भारी बैरिकेडिंग लगाकर रोके जाने से नाराज शिक्षक सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
शनिवार सुबह से ही राज्य के सभी 13 जिलों से भारी संख्या में प्राथमिक शिक्षक देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में एकत्रित होना शुरू हो गए थे। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय पदाधिकारियों ने जनसभा को संबोधित करते हुए शिक्षकों से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। इसके बाद शिक्षकों का हुजूम मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ा। प्रदर्शनकारियों की भारी तादाद के चलते ईसी रोड, राजपुर रोड और कनक चौक के आसपास यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
इस दौरान प्राथमिक शिक्षक संघ चमोली के जिला अध्यक्ष दिगंबर नेगी ने सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, उत्तराखंड के नौनिहालों के भविष्य का निर्माण करने वाला शिक्षक आज अपनी जायज मांगों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिन-रात दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले इन राष्ट्र निर्माताओं की आवाज को शासन और सरकार द्वारा लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
वहीं, जिला अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक धर्मेंद्र रावत ने कहा कि सरकारी मशीनरी को सुचारू रूप से चलाने में शिक्षक और कर्मचारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सरकार की हर कल्याणकारी योजना को धरातल पर शिक्षक ही पहुंचाते हैं। इसके बावजूद उनकी वाजिब समस्याओं पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में हर वर्ग की बात सुनी जानी चाहिए, लेकिन यहाँ नौकरशाही के चलते कर्मचारियों का उत्पीड़न हो रहा है।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने शिक्षा विभाग द्वारा लागू की जा रही री-एग्जाम प्रक्रिया का पुरजोर विरोध किया। शिक्षक नेताओं का तर्क है कि जो शिक्षक पहले ही विभाग के कड़े मानकों और पात्रता परीक्षाओं को पास करके सेवा में आए हैं, उन्हें वर्षों की नौकरी के बाद दोबारा परीक्षा के जाल में फंसाना पूरी तरह अतार्किक और अनुचित है। उन्होंने इस दमनकारी प्रक्रिया को तुरंत वापस लेने की मांग की।प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार 9 सूत्रीय मांगों पर ठोस और सकारात्मक निर्णय लेते हुए शासनादेश जारी नहीं करती, तब तक उनका यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
