बागेश्वर में फर्जी प्रमाण पत्रों पर नौकरी कर रहे 10 शिक्षक बर्खास्त।

बागेश्वर में फर्जी प्रमाण पत्रों पर नौकरी कर रहे 10 शिक्षक बर्खास्त।

बागेश्वर:-03 अक्टूबर 2026

उत्तराखंड में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी अपने वाले शिक्षकों पर नकेल कसे जाने का सिलसिला जारी है। इस कड़ी में राज्य में अलग-अलग जिलों से शिकायतों के आधार पर जांच जारी है। खास बात यह है कि प्रमाण पत्रों की जांच में इनके फर्जी पाए जाने के बाद ऐसे शिक्षकों पर कार्रवाई भी की जा रही है।

बागेश्वर जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है ,जहां पर शिक्षा विभाग की कड़ी कार्यवाही के बाद 10 शिक्षकों को एक साथ बर्खास्त किया गया है। बताते चलें राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के आधार पर पिछले दो महीने से 10 शिक्षक कार्यरत थे जिनके खिलाफ शिक्षा विभाग ने एक्शन लिया है।

बता दें बागेश्वर जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र के आधार पर पिछले 2 महीने से 10 शिक्षक कार्यरत थे। विभागीय सत्यापन के दौरान रामनगर बोर्ड की जांच में इन शिक्षकों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। फर्जी प्रमाण पत्र पर कार्यवाही करते हुए शिक्षा विभाग ने 10 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। एक साथ 10 शिक्षकों के बर्खास्त होने से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है यह मामला बागेश्वर कपकोट और कांडा विकासखंड के प्राथमिक विद्यालयों से संबंधित है जहां पर विभागीय सत्यापन प्रक्रिया के तहत शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण कार्रवाई की है।

10 शिक्षकों के प्रमाण पत्र लंबे समय बाद फर्जी पाए जाने से नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अब यह जानना भी आवश्यक हो गया है कि जिन प्रमाण पत्रों को अब बोर्ड की जांच में फर्जी बताया गया है उनकी नियुक्ति के समय सत्यापन किस स्तर पर हुआ था। इसके साथ ही संबंधित अभिलेखों की जांच में चूक कैसे हुई यह भी जांच का विषय बन गया है। एक साथ 10 शिक्षकों के बर्खास्त होने से विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी से पहले ही स्कूल जूझ रहे हैं अब उनके बर्खास्त होने से एक बार फिर पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत के मुताबिक विभिन्न जिलों में ऐसे शिक्षकों को चिन्हित किया गया है। लगातार ऐसे शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच भी की जा रही है।इसमें शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के अलावा TET और स्थाई निवास प्रमाण पत्र के भी फर्जी होने का अंदेशा है,जिसके बाद बड़े स्तर पर जांच चल रही है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल ऐसे विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर है जहां खुद शिक्षक फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर भर्ती हुए हैं। निदेशक प्राथमिक शिक्षा कुंवर सिंह रावत के मुताबिक नियुक्ति से लेकर सभी प्रक्रियाएं जिला स्तर पर पूरी की जाती हैं। इसीलिए अब बर्खास्तगी के आदेश भी जिला स्तर पर ही किए जा रहे हैं।

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