उत्तराखंड में फिर उठी पुरानी पेंशन बहाली की मांग,पुरानी पेंशन बहाली को कर्णप्रयाग में निकली हुंकार रैली।
कर्णप्रयाग (चमोली)- 24 मई 2026
रिपोर्ट-ललिता प्रसाद लखेड़ा.
पेशन बहाली संयुक्त मोर्चा की ओर से कर्णप्रयाग में पुरानी पेंशन बहाली को लेकर हुंकार रैली निकाली गई। पुरानी पेंशन बहाली को लेकर कर्मचारी शिक्षकों ने कर्णप्रयाग में जोरदार हुंकार रैली निकाली। यह रैली उमा लाॅज से प्रारंभ होकर पंच पुलिया होते हुए मुख्य चैराहे पर पहुंची। इस अवसर पर कर्मचारी शिक्षकों ने पेंशन बहाली के समर्थन में जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन किया। इसके उपरांत यह रैली सभा में तब्दील हो गई।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मनोज अवस्थी ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली में सभी कर्मचारी-शिक्षकों को एक जुट होना होगा.उन्होंने कहा कि कर्णप्रयाग में आयोजित यह रैली दूसरी बड़ी रैली है। इसके जरिए सभी शिक्षक कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन बहाली के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है।
प्रदेश उपाध्यक्ष पूरन फरस्वाण ने कहा कि अब पुरानी पेंशन बहाली को लेकर सब लोग इसी तरह सरकार पर दबाब बनाने में कामयाब होंगे। जिलाध्यक्ष सतीश कुमार ने कहा कि भविष्य में भी यह आंदोलन जारी रहेगा। मांग पूरी न होने तक कर्मचारी शिक्षक कार्य बहिष्कार आंदोलन करेंगे। इसके बाद भी कोई कदम नहीं उठाए गए तो फिर पुरानी पेंशन के समर्थन में 2027 के चुनाव में वोट करेंगे।
जिला महासचिव दिनेश नेगी ने कहा कि कर्मचारी शिक्षक इस सवाल पर सड़क पर उतर आए है। इस बावजूद सरकार मांगों को लेकर कोई कदम नहीं उठा रही है। कहा कि जब विधायक और सांसद पेंशन ले सकते तो कर्मचारी शिक्षक क्यों नही। राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रकाश चैहान ने कहा कि कर्णप्रयाग की हुंकार रैली में उमड़ी भीड़ ने जता दिया है कि सभी कर्मचारी शिक्षक एकजुट हैं।
संगठन ने आरोप लगाया कि बाजार आधारित नई पेंशन योजना कर्मचारियों के भविष्य की गारंटी नहीं देती,जबकि पुरानी पेंशन योजना (OPS) जीपीएफ आधारित सुरक्षित व्यवस्था थी।मोर्चा ने यह भी कहा कि उत्तराखंड में पुरानी पेंशन बहाली को लेकर लगातार आंदोलन और ज्ञापन दिए जा चुके हैं। संगठन के अनुसार राज्य के सांसदों, विधायकों और विभिन्न जनप्रतिनिधियों को भी इस संबंध में ज्ञापन सौंपे गए हैं।संगठन ने यह भी याद दिलाया गया कि मुख्यमंत्री के पिछले कार्यकाल में इस मुद्दे पर एक समिति का गठन किया गया था,लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
संगठन ने दावा किया कि पुरानी पेंशन लागू करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में है और राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, झारखंड तथा छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में इसे लागू भी किया जा चुका है। ऐसे में उत्तराखंड सरकार को भी कर्मचारियों के हित में फैसला लेना चाहिए।राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस दौरान मंडलीय अध्यक्ष शंकर भट्ट, मण्डलीय महामंत्री राजीव उनियाल, देहरादून के जिलाध्यक्ष अवधेश सेमवाल, जिला संयोजक संतन रावत, संगठन मंत्री सुदर्शन बिष्ट, जिला कोषाध्यक्ष जगत सिंह फरस्वान, भीमराज, संजय, रोशन गुसाई, सीमा पुंडीर, मंजू, लक्ष्मी, रेखा बिष्ट, कुसुम बिष्ट, सुमन तोपाल, मीनाक्षी, योगेंद्र कुंवर, हिमांशु नेगी, राजकुमार हर्षवर्धन गैरोला समेत तमाम कर्मचारी शिक्षक मौजूद रहे
