गैरसैंण बीडीसी बैठक में जिला स्तरीय अधिकारियों के न पहुंचने पर भड़के पंचायत प्रतिनिधि,अनदेखी का आरोप लगाते हुए किया बैठक का बहिष्कार।
गैरसैंण:-30 अक्टूबर 2026
रिपोर्ट:-पुष्कर रावत.
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में आज ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी) की बैठक में उस समय भारी बवाल मच गया,जब जिला स्तरीय अधिकारियों की अनुपस्थिति से नाराज क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ग्राम प्रधानों का गुस्सा फूट पड़ा। एक वर्ष के लंबे अंतराल के बाद आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में एक भी जिला स्तरीय बड़ा अधिकारी नहीं पहुंचा। इससे आक्रोशित होकर त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों ने न केवल बैठक का पूर्ण बहिष्कार कर दिया,बल्कि ब्लॉक परिसर में ही धरने पर बैठकर सरकार और नौकरशाही के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हंगामे के बाद बैठक को आगामी तिथि तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
तीन बार पहले भी स्थगित हो चुकी थी बैठक,चौथी बार भी मिली मायूसी।
जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन पर गैरसैंण क्षेत्र की लगातार उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया। प्रधान संगठन के अध्यक्ष मनोज नेगी ने रोष व्यक्त करते हुए कहा, इससे पूर्व भी अधिकारियों की लापरवाही के कारण तीन बार बीडीसी बैठक निरस्त की जा चुकी थी। आज चौथी बार बड़ी उम्मीदों के साथ बैठक रखी गई थी। हमने पहले ही प्रशासन को चेताया था कि यदि जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी बैठक में नहीं आते हैं, तो इस बैठक का कोई औचित्य नहीं है। कहा कि,विकासखंड स्तर की छोटी समस्याओं के लिए एसडीएम और बीडीओ मौजूद हैं, लेकिन जिला व प्रदेश स्तर की बड़ी समस्याओं का निराकरण जिला स्तरीय अफसरों के बिना कैसे संभव है?कहा कि,पंचायत गठन से लेकर आज तक जनप्रतिनिधियों के साथ केवल छलावा किया जा रहा है।
पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप,वर्ष में हुई मात्र एक बैठक।
बैठक के बहिष्कार पर क्षेत्र पंचायत सदस्य व पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुमति बिष्ट ने कहा कि पंचायत चुनाव के बाद एक वर्ष का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक केवल एक ही बैठक आयोजित हो सकी है। उस पहली बैठक का आधा समय भी सिर्फ परिचय में निकल गया था। जब पूर्व में ही बैठक की तिथि निर्धारित थी, तो जिला स्तरीय अधिकारियों का न पहुंचना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
क्षेत्र पंचायत सदस्य वीरेंद्र आर्य ने कहा कि,लगातार पंचायत प्रतिनिधियों को बेवकूफ बनाने का कार्य किया जा रहा है। बताया कि विगत कई बार बैठक स्थगित होने के बाद आज बैठक रखी गई थी। लेकिन किसी भी जिला स्तरीय अधिकारी के बैठक में न पहुंच पाने के कारण बैठक का बहिष्कार करना पड़ा।कहा कि लगातार पंचायत प्रतिनिधियों की अनदेखी की जा रही है जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वीरेंद्र आर्य ने कहा कि आने वाले दिनों में यदि अधिकारियों का रवैया इसी प्रकार का रहा तो आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
क्षेत्र पंचायत सदस्य भूपेंद्र कुंवर ने कहा कि,जब से हम जनप्रतिनिधि चुनकर आए हैं, तब से बीडीसी के एक ही बैठक हुई है, कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की समस्याओं को रखने का माध्यम एकमात्र बीडीसी बैठक है,और डेढ़ वर्ष का समय होने को है और आज बीडीसी बैठक आयोजित की गई थी, लेकिन बैठक में जिला स्तर का कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं था।कहा कि हम अपनी क्षेत्र की समस्याएं किसके पास रखें। कहा कि गैरसैंण सूबे की ग्रीष्मकालीन राजधानी है और बीडीसी बैठक में अधिकारियों का न पहुंचना निंदनीय है।
ग्राम प्रधान दिवानी राम, ग्राम प्रधान हुकुम सिंह ग्राम प्रधान अमर दीप ,ग्राम प्रधान सुरेंद्र नेगी सहित तमाम प्रधानों व क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने कहा कि अधिकारियों के न पहुंचने से लगातार बीडीसी बैठकें स्थगित हो रही हैं,जिससे पंचायत के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।कहा कि आज काफी लंबे समय बाद बैठक का आयोजन किया गया था लेकिन अधिकारियों के न पहुंच पाने के चलते विरोध के बाद बैठक को स्थगित करना पड़ा।उन्होंने इसे पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन बताया।
वहीं इस पूरे मामले को लेकर ब्लॉक प्रमुख दुर्गा रावत व खंड विकास अधिकारी पवन कंडारी ने कहा कि, जिलाधिकारी व सीडीओ के अवकाश पर होने के चलते वो बैठक में नही पहुंच पाए,वहीं परियोजना निदेशक जिनके पास जिला विकास अधिकारी का भी चार्ज है वो स्वास्थ्य कारणों से बैठक में नही आ पाए।
बता दें कि इससे पूर्व में भी तीन बार अधिकारियों के न आने के कारण बीडीसी बैठक को स्थगित किया जा चुका है,और आज एक बार फिर जिलास्तरीय अधिकारियों के लंबे समय बाद आयोजित बैठक में न पहुंचने को लेकर क्षेत्र पंचायत सदस्यों व ग्राम प्रधानों के भारी हंगामे के बाद बैठक को स्थगित करना पड़ा है। जिससे कि पंचायतों के विकास कार्यों पर भी कहीं न कहीं प्रभाव पड़ता दिखाई दे रहा है।
पंचायतों को मजबूत करने के सरकारी दावों को लगा पलीता
एक तरफ जहां प्रदेश सरकार ग्राम पंचायतों को डिजिटल और वित्तीय रूप से मजबूत करने की बातें कह रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर जिला स्तरीय अधिकारी बैठकों से नदारद रहकर सरकार की इस मुहिम को पलीता लगा रहे हैं। बार-बार बीडीसी बैठकों का टलना यह साफ दर्शाता है कि पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों के प्रति प्रशासनिक तंत्र कितना उदासीन है। जिसको लेकर पंचायत प्रतिनिधियों में भारी रोष देखने को मिल रहा है।
