गधे-घोड़ों वाले बयान में उलझी बीजेपी ,कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं पर छिड़ी बहस।

गधे-घोड़ों वाले बयान में उलझी बीजेपी ,कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं पर छिड़ी बहस।

देहरादून:-15 अक्टूबर 2026

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान के एक बयान ने पार्टी की अपनी राजनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को लेकर गधे-घोड़ों वाली टिप्पणी की, लेकिन अब सवाल भाजपा के भीतर ही उठ रहे है। कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने उन्हें सोच-समझकर बयान देने की नसीहत दी, तो कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने भाजपा में कांग्रेस पृष्ठभूमि वाले नेताओं की मौजूदगी का हवाला देकर पलटवार किया है।

भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस में रहते हुए जो नेता गधे-घोड़ों की श्रेणी में थे, वे भाजपा में आने के बाद बेहतर विचारधारा वाले बन गए… बयान के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा में शामिल हुए मथुरा दत्त जोशी से ही पूछ लिया जाना चाहिए कि इस टिप्पणी के हिसाब से वे किस श्रेणी में आते हैं।

पूर्व में कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और वर्तमान में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी जनवरी 2025 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे । उन्होंने भी पलटवार करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को कांग्रेस के भीतर झांकने की नसीहत दी और कहा कि भाजपा में निष्ठावान और काम करने वाले लोग है। लेकिन विवाद में नया मोड़ तब आया, जब धामी सरकार के कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने अपने ही पार्टी के मीडिया प्रभारी को नसीहत दे दी। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को सोच-समझकर बयान देना चाहिए और विवादित टिप्पणियों से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के इस आंतरिक मामले का संज्ञान प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री लेंगे।

मनवीर चौहान के बयान के बाद धामी कैबिनेट में शामिल नेताओं की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में है। कांग्रेस से भाजपा में आए सतपाल महाराज 2014 में भाजपा में शामिल हुए थे। सुबोध उनियाल और प्रदीप बत्रा ने मई 2016 में भाजपा का दामन थामा, जबकि रेखा आर्य भी 2016 में कांग्रेस से अलग होकर भाजपा के साथ आईं। भरत सिंह चौधरी 2013 से भाजपा से जुड़े रहे हैं, राम सिंह कैड़ा 2012 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे, जबकि सौरभ बहुगुणा स्वयं कांग्रेस छोड़कर भाजपा में नहीं आए। उनके पिता विजय बहुगुणा कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे और 2016 में भाजपा में शामिल हुए थे

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत ने भी मनवीर चौहान के बयान पर भाजपा को घेरा उन्होंने कहा कि भाजपा अगर मनवीर चौहान की टिप्पणी को गंभीरता से लेती, तो कांग्रेस से आए नेताओं को टिकट नहीं देती,हरक सिंह रावत ने 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए मनवीर चौहान की राजनीतिक हैसियत पर सवाल उठाए है।

उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस से भाजपा में आने वाले नेताओं का सिलसिला नया नहीं है, 2014 में सतपाल महाराज से लेकर 2016 में कांग्रेस के बागी विधायकों और बाद के वर्षों में दूसरे नेताओं के भाजपा में आने तक, पार्टी ने कई नेताओं को संगठन और सरकार में जगह दी। एक तरफ 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा का लक्ष्य तीसरी बार सत्ता में वापसी करना है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को लेकर की गई टिप्पणी ने पार्टी के भीतर ही सवाल खड़े कर दिए है। कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा की नसीहत और कांग्रेस के पलटवार ने इस विवाद को और चर्चा में ला दिया है। ऐसे में सवाल है कि चुनाव से पहले भाजपा अपने पुराने कार्यकर्ताओं और दूसरी पार्टी से आए नेताओं के बीच संतुलन का संदेश कैसे देगी ?

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