उपनल और वन विभाग के दैनिक श्रमिकों के न्यूनतम वेतन-नियमितीकरण पर हुई सुनवाई,सरकार द्वारा पूर्व आदेशों का अनुपालन न करने पर जताई नाराजगी।
नैनीताल-21 अप्रैल 2026
उत्तराखंड हाईकोर्ट नैनीताल ने उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ और वन विभाग में वर्षों से कार्यरत दैनिक श्रमिकों को अभी तक कोर्ट का आदेश होने के बाद भी नियमित नहीं करने के खिलाफ दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई की। इस मामले की अगली सुनवाई 8 मई को होगी।
मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर सचिव कार्मिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। कोर्ट ने पूर्व के आदेश का अवलोकन किया. सचिव कार्मिक को सुझाव देकर कहा कि सचिव कार्मिक, सचिव वित्त और मुख्य सचिव आपस में बैठकर यह निर्णय लें कि जो वर्तमान नियमावली है, उसके आधार पर इनको कैसे नियमित किया सकता है।साथ में हाईकोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों और वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतनमान दिए जाने के बारे में भी सोचने को कहा है। हाईकोर्ट ने सचिव कार्मिक से इस पर 8 मई तक जवाब पेश करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 मई की तिथि नियत की गई है।
नैनीताल हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान उत्तराखंड सरकार की तरफ से कहा गया कि उपनल से लगे कर्मचारियों को नियमित करने का कोई प्रावधान नहीं है। इस पर संविदा कर्मचारी संघ के अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष उनका पक्ष रखते हुए कहा कि पूर्व में कोर्ट की खंडपीठ ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के सम्बंध में एक आदेश जारी किया था। लेकिन इस आदेश पर अब तक राज्य सरकार की तरफ से कोई निर्णय नहीं लिया गया। ना ही इसे उच्च न्यायलय के रिकॉर्ड में लाया गया है। पूर्व में कर्मचारी संघ की ओर से पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस अवमानना याचिका पर (उत्तराखंड उपनल कर्मचारी संघ बनाम आनन्द बर्धन, मुख्य सचिव उत्तराखंड) की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की मांग की थी।
हाईकोर्ट में क्या हुआ?
न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ ने पूर्व आदेशों का अनुपालन न करने पर नाराजगी जताई। मामले में सचिव कार्मिक शैलेश बगौली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। अगली सुनवाई 8 मई 2026 को होगी।
उपनल संविदा कर्मचारी संघ के वकीलों ने बताया कि खंडपीठ के आदेशों के बावजूद सरकार अभी तक नियमितीकरण पर ठोस निर्णय नहीं ले सकी है।उत्तराखंड सरकार ने कहा कि उपनल कर्मियों को नियमित करने का कोई प्रावधान नहीं है। न्यूनतम वेतनमान पर विचार किया जा रहा है।कर्मचारियों ने समान काम-समान वेतन,नियमितीकरण और जीएसटी की कटौती रोकने की मांग की है।
