हाईकोर्ट का सरकार से सवाल : विरोध प्रदर्शन में जाने वाला नागरिक अपराधी कैसे ?

हाईकोर्ट का सरकार से सवाल : विरोध प्रदर्शन में जाने वाला नागरिक अपराधी कैसे ?

नैनीताल:-21 जुलाई 2026

उत्तराखंड उच्च न्यायालय में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी(यू.पी.पी.)के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से पुलिस द्वारा नियमों के विरुद्ध जबरन ले जाने संबंधी याचिका में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ती रविंद्र मैठानी और न्यायमूर्ती सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने राज्य सरकार सहित अन्य पक्षकारों से चार सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर के लिए तय की है।

याचिकाकर्ता की अधिवक्ता स्निग्धा तिवाड़ी ने बताया की आज राज्य सरकार ने घटना की स्थिति से अवगत कराते हुए कहा कि उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 172 के तहत कार्यवाही की है। क्योंकि वे छात्रों और सिजेपी का जो दिल्ली मे प्रोटेस्ट चल रहा है उसमे प्रतिभाग करने जा रहे थे। इस संबंध मे दिल्ली पुलिस ने सभी राज्यों को एक नोटिस जारी कर कहा कि जो भी व्यक्ति इसमें शामिल होने को आ रहा है उन्हें राज्य अपने बॉर्डर एरिया पर रोक दें। न्यायालय ने इसपर सरकार से कई सवाल किये। उन्होंने पूछा कि किस नियम के तहत और किस अपराध के लिए उन्हें रेल से उठा लिया। आपको कैसे पता कि वे प्रोटेस्ट में शामिल होने जा रहे थे। क्या यह नागरिकों कि स्वतन्त्रता का हनन नहीं है। जो कहीं आ जा नहीं सकते ?

मामले के अनुसार उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय सचिव लाल मणि द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा है कि उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी सोनम वांगचुक के विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए कल शाम ऋषिकेश से दिल्ली जा रहे थे। उनके द्वारा सोशियल मिडिया मे एक पोस्ट डाली थी कि हम और उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के लोग छात्रों की शिक्षा की मांग और सोनम वांगचुक के समर्थन मे भाग लेने जा रहे है।तभी उन्हें ऋषिकेश रेलवे स्टेशन में उत्तराखंड पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया। प्रभात ध्यानी का जब कुछ पता नही चल सका कि उन्हें पुलिस कहा लेकर गई है और उनका स्वास्थ्य कैसा है तो उनके परिवार को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनका मोबाईल भी जब्त कर लिया गया।

याचिका में कहा गया है कि इस तरह से एक वयस्क व्यक्ति को रेलवे स्टेशन से हिरासत में लिया जाना मौलिक अधिकारों का हनन है।जिसके लिए पुलिस की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। जबकि वे स्वास्थ्य चेकअप करने के लिए भी गए हुए थे। बिना किसी कारण के उन्हें पुलिस द्वारा उठा लेना कानून के विरुद्ध है।

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