उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति मामले पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, कहा- सरकार बार-बार मांग रही समय,अब 24 घंटे के भीतर जवाब करें पेश।

उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति मामले पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, कहा- सरकार बार-बार मांग रही समय,अब 24 घंटे के भीतर जवाब करें पेश।

नैनीताल-13 मई 2026

उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग से जुड़ी दायर जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी की बैठक नहीं करने पर गहरी नाराजगी जताई। खंडपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि राज्य सरकार कोर्ट से बार-बार समय की मांग करती आ रही है, ऐसे में अब सरकार से 24 घंटे के भीतर इस पर अपना जवाब पेश करें।

कोर्ट ने पूछा है कि अभी तक पूर्व के आदेश का अनुपालन क्यों नहीं हुआ? जवाब पेश नहीं करने पर संबंधित सचिव 15 मई को 11 बजे कोर्ट में पेश होंगे। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार यानी 15 मई को होगी। आज यानी 13 मई को हुई सुनवाई पर कोर्ट ने सरकार से पूछा कि पूर्व के आदेश का अनुपालन हुआ या नहीं? जिस पर सरकार ने कोर्ट से और समय देने की मांग की गई। कोर्ट ने बार-बार समय की मांग करने पर नाराजगी व्यक्त की। पिछली सुनवाई के दौरान को कोर्ट ने सरकार से कहा था कि 3 अप्रैल को जो सर्च कमेटी की बैठक होनी है. उस बैठक में लिए गए निर्णय को शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट में पेश करें, लेकिन 3 अप्रैल को सर्च कमेटी का कोरम पूरा नहीं होने के कारण उसकी बैठक नहीं हो पाई. जिस पर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 हफ्ते बाद की तिथि रखी थी। इससे पहले की तिथि पर हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से लोकायुक्त की नियुक्ति करने के लिए कोर्ट से 6 महीने का समय मांगा गया था, लेकिन कोर्ट ने 3 महीने का समय देते हुए लोकायुक्त को नियुक्त करने को कहा था। एक साल बीत जाने के बात भी अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हो पाई।

आज तक सर्च कमेटी की बैठक तक नहीं हो पाई। जबकि, इनकी नियुक्ति करने के लिए साल 2021 में जनहित याचिका दायर की गई थी. जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि एक साल पहले भी सरकार की तरफ से लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए समय मांगा गया था। अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हो पाई, अब और समय मांगा जा रहा है।

क्या है मामला?⤵️

दरअसल, नैनीताल के गौलापार निवासी रवि शंकर जोशी ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार ने अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की. जबकि, संस्थान के नाम पर सालाना 2 से 3 करोड़ रुपए खर्च हो रहे है। याचिका में कहा गया है कि कर्नाटक और मध्य प्रदेश में लोकायुक्त नियुक्त है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है, लेकिन उत्तराखंड में तमाम घोटाले हो रहे हैं। हर एक छोटा से छोटा मामला भी हाईकोर्ट की शरण में लाना पड़ रहा है। याचिका में ये भी कहा गया है कि वर्तमान समय में राज्य की सभी जांच एजेंसियां सरकार के अधीन है, जिसका पूरा नियंत्रण राजनीतिक नेतृत्व से जुड़े लोगों के हाथों में है। वर्तमान में उत्तराखंड में कोई भी ऐसी जांच एजेंसी नही है, जिसके पास ये अधिकार हो कि वो बिना शासन की पूर्वानुमति के किसी भी राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा पंजीकृत कर सके। स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के नाम पर प्रचारित किया जाने वाला विजिलेंस विभाग भी राज्य पुलिस का ही हिस्सा है, जिसका पूरा नियंत्रण पुलिस मुख्यालय, सतर्कता विभाग या फिर मुख्यमंत्री कार्यालय के पास ही रहता है। एक पूरी तरह से पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच व्यवस्था राज्य के नागरिकों के लिए कितनी अहम है। इसलिए रिक्त पड़े लोकायुक्त की नियुक्ति जल्द की जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!