हरिद्वार में कैबिनेट बैठक से पहले कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने खोला मोर्चा, दो मांगों पर सरकार को दी आमरण अनशन की चेतावनी।
रवासन नदी पर पुल निर्माण और भोजनमाताओं का मानदेय पांच हजार रुपये करने की मांग उठाई।
हरिद्वार:- 11 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड की धामी सरकार की सोमवार को हरिद्वार में प्रस्तावित कैबिनेट बैठक से पहले कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सरकार के सामने लालढांग क्षेत्र में रवासन नदी पर पुल निर्माण शुरू कराने और भोजनमाताओं का मानदेय बढ़ाकर पांच हजार रुपये करने का शासनादेश जारी करने की मांग रखी है। विधायक ने चेतावनी दी कि कैबिनेट बैठक में इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो वह आमरण अनशन करने के लिए बाध्य होंगी।
रविवार को विधायक अनुपमा रावत ने हरिद्वार के अजितेश विहार स्थित अपने आवास पर भोजनमाताओं के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने भोजनमाताओं की समस्याएं सुनीं और उनके मानदेय में वृद्धि की मांग को प्रमुखता से उठाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली भोजनमाताएं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाती हैं, लेकिन उनके मानदेय में पर्याप्त वृद्धि नहीं होने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकार को उनकी मांग पर निर्णय लेते हुए पांच हजार रुपये मासिक मानदेय का शासनादेश जारी करना चाहिए। विधायक ने लालढांग क्षेत्र में रवासन नदी पर पुल निर्माण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पुल नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नदी पार करते समय हादसों का खतरा बना रहता है और कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद लंबे समय से पुल निर्माण का मामला लंबित है। उन्होंने मांग की कि सोमवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस विषय पर गंभीरता से विचार कर निर्माण कार्य का रास्ता साफ किया जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके।अनुपमा रावत ने पुल निर्माण के मुद्दे पर भाजपा के पूर्व विधायक पर भी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से इस समस्या के समाधान की उम्मीद लगाए बैठी है और अब सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
कांग्रेस विधायक ने भाजपा सरकार की कैबिनेट बैठकों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी वर्ष में कभी खटीमा तो कभी हरिद्वार में बैठकें आयोजित की जा रही हैं, लेकिन जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने इन बैठकों को आडंबर बताते हुए कहा कि केवल बैठकें आयोजित करने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि जरूरी फैसले जमीन पर लागू करने होंगे।उन्होंने कहा कि रवासन नदी पर पुल निर्माण और भोजनमाताओं के मानदेय में वृद्धि केवल मांगें नहीं, बल्कि आम लोगों की जरूरतों से जुड़े मुद्दे हैं। अब सबकी नजर सोमवार की कैबिनेट बैठक पर है कि सरकार इन मांगों पर क्या निर्णय लेती है।
