विदेशी छात्रा से दुष्कर्म मामले में आरोपी छात्र बरी,पुलिस पर भी कड़ी टिप्पणी।

विदेशी छात्रा से दुष्कर्म मामले में आरोपी छात्र बरी,पुलिस पर भी कड़ी टिप्पणी।

देहरादून-01 फरवरी 2026

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनी शुक्ला की अदालत ने एक निजी विश्वविद्यालय की विदेशी छात्रा से दुष्कर्म मामले में विदेशी छात्र को बरी कर दिया है। यह मामला अक्टूबर 2024 में दिल्ली के कश्मीरी गेट थाने से जीरो एफआईआर के तहत दर्ज हुआ था, जिसे विवेचना के लिए तत्काल देहरादून पुलिस के पास भेजा गया था।

जानकारी के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका की रहने वाली पीड़ित छात्रा देहरादून के निजी कॉलेज से ग्रेजुएशन कर रही थी। पीड़िता ने पुलिस को बयान दिया था कि 29 अक्टूबर 2024 की रात क्लेमेंटाउन थाना क्षेत्र में उनके समूह की फेयरवेल पार्टी थी, जिसमें उसके संस्थान के कई छात्र और छात्राएं शामिल हुए। पार्टी के बाद में वो सो रही थी।आरोप है कि तभी दक्षिण सूडान के छात्र ने बेसुध अवस्था में उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद वो अगले दिन इंटरव्यू देने के लिए दिल्ली गई और दिल्ली में पहुंचकर दिल्ली कश्मीरी गेट थाने में जीरो एफआईआर दर्ज कराई गई। जिसके बाद विवेचना के लिए तत्काल देहरादून आईएसबीटी चौकी के पास भेजा गया था।

पीड़िता ने अदालत में बयान दिया कि उसने और उसके सभी साथियों ने पार्टी में ड्रिंक की थी। नशे में होने के कारण उसे किसने और कब टच किया, उसे ठीक से याद नहीं है। पार्टी में मौजूद अन्य विदेशी छात्रों ने अहम गवाही दी। उन्होंने गवाही में कहा कि आरोपी और पीड़िता अलग-अलग कमरों में सोए थे।एक छात्र ने अदालत में गवाही दी कि उस रात में पीड़िता के चिल्लाने की आवाज आई थी, लेकिन शायद वो नींद में कोई बुरा सपना देखकर उठी थी। वो उसके कमरे में गए तो आरोपी छात्र वहां मौजूद नहीं था। इन गवाहों और बयानों के आधार पर आरोप कमजोर साबित हो गया।

वहीं,जांच अधिकारी की लापरवाही भी सामने आई है।अभियोजन अधिवक्ता किशोर रावत ने बताया कि अदालत ने आरोपी को बरी करने की फैसले में क्लेमेंटटाउन थाने के तत्कालीन जांच अधिकारी के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर संजीत कुमार ने इस मामले में साइंटिफिक एविडेंस को सिरे से नजरअंदाज किया है।छात्रा का आरोप था कि उसके साथ सोते समय दुष्कर्म किया गया,ऐसे में सामान्य प्रक्रिया के तहत पुलिस को उसके बिस्तर की चादर और वहां मौजूद कपड़ों को फोरेंसिक जांच के लिए जब्त करना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अदालत ने सभी का भाव को सुनने के बाद दक्षिण सूडान के छात्र को सभी आरोपों से दोष मुक्त कर दिया।

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