भारतीय सेना की ओर से आयोजित ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0’ का शुक्रवार को हेलंग (जोशीमठ) से शुभारंभ ।
चमोली-/ भारतीय सेना की ओर से आयोजित ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0’ का शुक्रवार को हेलंग (जोशीमठ) से शुभारंभ हो गया। गढ़वाल हिमालय के बदरी–केदार ट्रेल मार्ग पर हो रहे इस 113 किमी लंबे धीरज आधारित आयोजन में देशभर से आए 300 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिता के पहले दिन प्रतिभागियों ने हेलंग से कलगोठ तक 36 किमी का कठिन सफर तय किया। इस दौरान पंचकेदार के प्रथम धाम कल्पेश्वर मंदिर क्षेत्र पहुंचने पर मंदिर के हक-हकूकधारियों और महिला मंगल दल ने ढोल-दमांऊ के साथ जोरदार स्वागत किया।
उत्तराखंड में शुक्रवार सुबह से 113 किलोमीटर लंबा ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0’ शुरू हो गया। बद्रीनाथ धाम से जुड़े इस ट्रेल पर देशभर से आए करीब 300 धावक दौड़ रहे हैं। ऊंचाई, चढ़ाई और बदलते मौसम के बीच ये रेस तीन दिन में पूरी की जाएगी। इस रेस को सबसे पहले पूरा करने वाले को एक लाख का इनाम दिया जाएगा।
चैलेंज को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहले दिन हेलंग से 36 किलोमीटर की दौड़ होगी, दूसरे दिन कलगोट से 39 किलोमीटर और तीसरे दिन उखीमठ तक करीब 38 किलोमीटर की दौड़ होगी। पूरा रूट पुराने बद्री-केदार पैदल मार्ग पर है, जो पहले तीर्थ यात्रा का अहम रास्ता रहा है। रास्ते में पंच-केदार के तीन धाम कल्पेश्वर, रुद्रनाथ और तुंगनाथ आते हैं।
इस आयोजन के जरिए सरकार और सेना पहाड़ के गांवों में पर्यटन बढ़ाने, स्थानीय लोगों को काम से जोड़ने और इस पुराने ट्रेल को फिर से एक्टिव करने की कोशिश कर रहे हैं। रेस के बहाने जिन गांवों से धावक गुजरेंगे, वहां सीधा असर दिखने की उम्मीद है।
शुक्रवार सुबह 9 बजे हेलंग से धावकों को रवाना किया गया। शुरुआत के साथ ही सभी प्रतिभागी पहाड़ी ट्रैक पर निकल पड़े। पहले दिन का पड़ाव कलगोट है, जहां धावक करीब 36 किलोमीटर की दूरी तय करके पहुंचेंगे। यहां उनके ठहरने के लिए आर्मी ने होमस्टे की व्यवस्था की है, ताकि स्थानीय स्तर पर भी इसका फायदा मिले।
10 हजार फीस, 18 से 60 साल तक के धावक शामिल:- इस रेस में हिस्सा लेने के लिए 10 हजार रुपए रजिस्ट्रेशन फीस रखी गई थी। 18 से 60 साल तक के लोग इसमें भाग ले रहे हैं। इनमें प्रोफेशनल रनर भी हैं और ऐसे लोग भी हैं जो एडवेंचर के शौक में यहां पहुंचे हैं।
प्रतियोगिता में इनाम भी रखा गया है, पहले स्थान पर आने वाले को 1 लाख रुपए और दूसरे को 50 हजार रुपए मिलेंगे। इसके अलावा बाकी प्रतिभागियों को भी अलग-अलग कैटेगरी में सम्मान दिया जाएगा।
इस रेस में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग पहुंचे हैं। जम्मू-कश्मीर से लेकर तमिलनाडु तक के प्रतिभागी इसमें शामिल हैं। महिला धावकों की भी अच्छी भागीदारी देखने को मिल रही है।
पिछली बार गंगोत्री-यमुनोत्री, इस बार बद्री-केदार:- पिछले साल यह आयोजन हर्षिल, गंगोत्री और यमुनोत्री क्षेत्र में हुआ था। इस बार इसे बद्री-केदार ट्रेल पर लाया गया है। लोकेशन बदलने से रूट भी ज्यादा कठिन और लंबा हो गया है।
गांवों में होमस्टे और काम के मौके बढ़ेंगे:-इस रेस का सीधा असर रास्ते में पड़ने वाले गांवों पर पड़ेगा। धावकों के ठहरने, खाने और गाइड जैसी जरूरतों से स्थानीय लोगों को काम मिल रहा है। होमस्टे मॉडल को बढ़ावा देने की भी कोशिश की जा रही है, ताकि भविष्य में यहां ज्यादा पर्यटक आएं। इस आयोजन का उद्देश्य साहसिक खेलों के जरिए पर्यटन को बढ़ावा देना और सीमांत गांवों में रोजगार के अवसर सृजित करना है। ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत आयोजित यह प्रतियोगिता स्थानीय विकास को भी गति देगी। प्रतियोगिता में शामिल भोपाल की एक महिला प्रतिभागी ने बताया कि वह इस दौड़ के माध्यम से अपने स्वर्गीय पिता कर्नल सत्यपाल को श्रद्धांजलि दे रही हैं। बता दें कि सेना का यह आयोजन राष्ट्र निर्माण और जनसहभागिता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
