अल्मोड़ा का वीर सपूत देश पर कुर्बान: राजौरी में ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी, पूरे उत्तराखंड में शोक।

अल्मोड़ा का वीर सपूत देश पर कुर्बान: राजौरी में ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी, पूरे उत्तराखंड में शोक।

उत्तराखंड-07 जून 2026

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले से समूचे उत्तराखंड के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है। आतंकवादियों की तलाश में चलाए जा रहे सेना के विशेष अभियान ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ के दौरान अल्मोड़ा के युवा सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी ने देश सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे दिया। महज 24 वर्ष की उम्र में मिली इस वीरगति की खबर ने पूरे कुमाऊं मंडल को शोक में डुबो दिया है। शहीद अधिकारी के बलिदान की सूचना मिलते ही उनके पैतृक क्षेत्र से लेकर अल्मोड़ा शहर तक मातम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि क्षेत्रवासी अपने वीर सपूत के अंतिम दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

आतंकियों की तलाश के दौरान हुआ हादसा ⤵️

प्राप्त जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के डोरी माल जंगल क्षेत्र में सेना और सुरक्षा एजेंसियां कई दिनों से आतंकवादियों की तलाश में व्यापक सर्च ऑपरेशन चला रही थीं। इसी अभियान के तहत लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी भी अपनी टीम के साथ मोर्चे पर तैनात थे। बताया जा रहा है कि दुर्गम पहाड़ी इलाके में अभियान के दौरान उनका पैर फिसल गया और वह गहरी खाई में जा गिरे। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। सेना के जवानों ने उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन वह देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। कुछ सैन्य सूत्रों के अनुसार ऑपरेशन के दौरान उनकी तबीयत भी अचानक बिगड़ गई थी। हालांकि सेना की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में उन्हें ऑपरेशन के दौरान बलिदान होने की पुष्टि की गई है।

कम उम्र में हासिल की थी बड़ी पहचान⤵️

लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के रानीखेत तहसील के बगवालीपोखर क्षेत्र के निवासी थे। उनका परिवार वर्तमान में अल्मोड़ा के पांडेखोला क्षेत्र में निवास करता है। बचपन से ही मेधावी, अनुशासित और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत बीरेश्वर ने कम उम्र में भारतीय सेना में अधिकारी बनकर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया था। सेना में उनकी कार्यशैली, नेतृत्व क्षमता और समर्पण की चर्चा अक्सर उनके साथियों के बीच होती थी। उनके व्यक्तित्व में विनम्रता और कर्तव्यनिष्ठा का अनूठा संगम था।

व्हाइट नाइट कोर ने दी श्रद्धांजलि⤵️

लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी के बलिदान पर भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर ने गहरा शोक व्यक्त किया है। व्हाइट नाइट कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल पी. के. मिश्रा सहित सभी अधिकारियों और जवानों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सेना की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि लेफ्टिनेंट गोस्वामी का साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

सैन्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार⤵️

सैन्य कल्याण अधिकारी सेवानिवृत्त विजय मनराल के अनुसार शहीद अधिकारी का पार्थिव शरीर बुधवार दोपहर लगभग तीन बजे अल्मोड़ा पहुंचने की संभावना है। इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रशासन और सेना की ओर से अंतिम यात्रा की तैयारियां की जा रही हैं। बड़ी संख्या में लोगों के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने की संभावना है।

क्षेत्र में शोक, लोगों ने जताया गर्व⤵️

शहादत की खबर सामने आने के बाद जनप्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर भी लोग अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। हालांकि पूरे क्षेत्र में गम का माहौल है, लेकिन लोगों के शब्दों में अपने बेटे के बलिदान पर गर्व भी झलक रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीरेश्वर ने अपने जीवन से यह साबित कर दिया कि उत्तराखंड की धरती आज भी ऐसे वीरों को जन्म देती है जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हैं।

हमेशा याद रखा जाएगा यह बलिदान⤵️

उत्तराखंड को सैनिकों की भूमि कहा जाता है और लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी ने इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया। महज 24 वर्ष की आयु में देश की सुरक्षा के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। आज अल्मोड़ा ने अपना एक होनहार बेटा खोया है, लेकिन भारत माता ने एक ऐसा अमर सपूत पाया है जिसकी बहादुरी और समर्पण की कहानी आने वाले वर्षों तक लोगों को प्रेरित करती रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!