दुर्दशा के बुरे दौर से गुजर रहा गैरसैंण का ऐतिहासिक इंटर कालेज मैदान।

दुर्दशा के बुरे दौर से गुजर रहा गैरसैंण का ऐतिहासिक इंटर कालेज मैदान।

मैदान पर पसरी गंदगी ओर दुर्गंध से मैदान पर जाना भी मुश्किल।

करोडों खर्च होने के बाबजूद रखरखाव की नहीं व्यवस्था।

गैरसैंण:-12 जुलाई 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला

ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण का ऐतिहासिक इंटर कालेज मैदान अपनी दुर्दशा के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। मैदान में पसरी गंदगी ओर उससे उठने वाली दुर्गंध इसकी गवाही दे रही है। किसी दौर में इस मैदान ने ओलंपियन सुरेंद्र भंडारी जैसे खिलाड़ियों को स्कूली दिनों में चैम्पियन बनते हुए देखा तो,वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से लेकर कई बड़े नेताओं के चुनावी सभाओं का गवाह भी रहा है।

ब्लॉक स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं,सरकारी आयोजनों,किसान मेलों की चहल-पहल व राज्य स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट का भी मुख्य केंद्र बिंदु रहा यह मैदान अब सरकारी उपेक्षा के चलते अपने सबसे बुरे दिनों से गुजर रहा है। कभी नन्हे -मुन्ने बच्चों ओर खिलाड़ियों से गुलजार रहने वाले मैदान पर खेलना तो दूर यहां बैठना तक दुभर हो गया है। मैदान व मंच पर पसरी गंदगी से निकलने वाली दुर्गंध के चलते शाम के वक्त यहां बैठने वाले नगरवासी भी अब ईधर का रूख नहीं करते।

पिछले ढाई दशकों में मैदान की दशा सुधारने के नाम पर जहां बड़ी-बड़ी घोषणाएं हुई, वहीं करोड़ों रुपया खर्च करने के बावजूद इस मैदान की दशा बिगडती चली गयी। मैदान सुधारीकरण के लिए पिछले 5 सालों में ही अब तक लगभग पौने तीन करोड रूपया अलग-अलग मद्दों से खर्च किया गया।2020-21 में गैरसैंण विकास परिषद के अंतर्गत चेंजिंग रूम, मंच निर्माण व सुरक्षा दीवार बनाने के लिए निर्माणदाई संस्था लोक निर्माण विभाग द्वारा 242 लाख से ज्यादा धनराशि खर्च की गयी। 2023-24 में नगर पंचायत गैरसैंण द्वारा दीवार व रेलिंग निर्माण पर ढाई लाख रुपए की धनराशि खर्च की गई।
वर्तमान में नगर पंचायत गैरसैंण द्वारा 27 लाख की धनराशि से मैदान विस्तारीकरण,समतलीकरण,निकास नाली व सुरक्षा दीवार का कार्य गतिमान है, जबकि बास्केट बाल के लिए बनाए जाने वाले कंक्रीट के कोर्ट का काम फिलहाल युवाओं के आग्रह पर रोक कर मिट्टी का बनाए जाने पर विचार चल रहा है।

2021 में बनाए गए चेंजिंग रूम व मंच रखरखाव के अभाव में दयनीय दशा में हैं ,जहां बिजली के टूटे हुए तार,शौचालयों में पसरी गंदगी व खिड़कीयों के टूटे हुए शीशे सरकारी कुप्रबन्धन की भेंट चढ गये हैं तो वहीं,मंच ओर मैदान पर एक तरफ निराश्रित गोवंश ने अपना अड्डा बनाया हुआ है ,वहीं बेरोकटोक मैदान पर आने वाले वाहनों फर कोई अंकुश न होने से मैदान की मिट्टी उखड जाती है।

उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पिछले ढाई दशक में ही करोड़ों रुपऐ खर्च होने के बावजूद स्थानीय खिलाड़ियों को कोई खास लाभ नहीं मिल पाया है। गैड गांव के काश्तकारों द्वारा राजकीय इंटर कालेज को दान में दिए गये इस खेल मैदान को कई बार मिनी स्टेडियम बनाए जाने की घोषणा भी हुई ,लेकिन कागजी अड़चनों के चलते कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाई।

दरअसल मैदान इंटर कालेज गैरसैंण के नाम पर दर्ज होने के चलते अन्य संस्थाएं काम तो करती हैं ,लेकिन रखरखाव की व्यवस्था न होने से हालात फिर वही रह जाते हैं। जिसको लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि खेल मैदान को खेल विभाग या नगर पंचायत जैसी संस्थाओं को हस्तांतरित किया जाना बेहद जरूरी है जिससे खेल मैदान का बेहतर सुधारीकरण होने के साथ ही उचित रखरखाव भी हो सके।तभी इसका समुचित लाभ खिलाड़ियों के साथ ही तमाम सरकारी ,सामाजिक ,सांस्कृतिक व राजनीतिक क्रियाकलापों के लिए हो सकेगा।

क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि

राज्य मंत्री व गैरसैंण नगर के गैड गांव निवासी रामचंद्र गौड ने कहा कि खेल मैदान का कई बार सुधारीकरण किया गया है ,लेकिन रखरखाव के अभाव में सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। लिहाजा खेल मैदान को खेल विभाग या नगर पंचायत जैसी संस्थाओं को हस्तांतरित कर उचित रखरखाव की व्यवस्था की मांग सरकार से की जाएगी।

नगर पंचायत गैरसैंण के अध्यक्ष मोहन भंडारी ने कहा की वर्तमान में 27 लाख रुपए की धनराशि से नगर पंचायत से मैदान विस्तारीकरण व सुधारीकरण का कार्य किया जा रहा है,लेकिन शासन स्तर से रखरखाव की उचित व्यवस्था न होने से मैदान बार-बार दुर्दशा का शिकार हो रहा है।

विधायक कर्णप्रयाग अनिल नौटियाल ने कहा कि यदि क्षेत्रवासी खेल मैदान को खेल विभाग या नगरपंचायत को स्थानांतरित करने की मांग करते हैं,तो इस बात को शासन स्तर पर ले जाकर सुधार के बेहतर प्रयास किये जाएंगे।

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