चमोली जनपद के नारायणबगड़ में देर रात हुई मूसलाधार बारिश,कई वाहन आये मलबे की चपेट में।
स्कूल और दुकानों में घुसा मलवा,राष्ट्रीय राजमार्ग हुआ अवरुद्ध।
नारायणबगड़ (चमोली):-26 जून 2026
उत्तराखंड के चमोली जिले में मानसून की दस्तक से पहले ही बारिश ने खतरे की घंटी बजा दी है। थराली विधानसभा क्षेत्र के नारायणबगड़ में देर रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद भारी मात्रा में मलबा बाजार और राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गया। कई वाहन मलबे की चपेट में आ गए, स्कूल और दुकानों में भी मलबा घुस गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। प्रशासन और बीआरओ ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं मार्ग खोलने का कार्य शुरू कर दिया है।
बृहस्पतिवार देर रात हुई भारी बारिश के बाद नारायणबगड़ बाजार में अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में पत्थर और मलबा आ गया। देखते ही देखते राष्ट्रीय राजमार्ग मलबे से पट गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। कई वाहन मलबे की चपेट में आ गए, जबकि राजकीय इंटर कॉलेज परिसर और आसपास की दुकानों में भी मलबा घुस गया। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा और नुकसान का आकलन शुरू किया। वहीं बीआरओ की टीम ने सुबह से ही जेसीबी मशीनों की मदद से सड़क खोलने का अभियान शुरू कर दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। पिछले आठ से दस वर्षों से हर बरसात में इसी स्थान पर भारी मात्रा में मलबा और पत्थर गिरते हैं, जिससे लैंडस्लाइड जैसी स्थिति बन जाती है। सबसे गंभीर बात यह है कि इसी स्थान पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नारायणबगड़ स्थित है, जो पूरे क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद अब तक यहां स्थायी सुरक्षा कार्य या ढलान उपचार नहीं किया गया, जिससे हर मानसून में लोगों की जान और संपत्ति पर खतरा बना रहता है।
चमोली जिला पहले से ही आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। पिछले वर्ष थराली और चेपड़ों क्षेत्र में आई भीषण आपदा में कई दुकानें मलबे में दब गई थीं और लोगों की आजीविका पूरी तरह प्रभावित हुई थी। चेपड़ों गांव के गंगादत्त जोशी आपदा में बह गए थे, जिनका शव आज तक बरामद नहीं हो सका। इसी को देखते हुए स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि थराली क्षेत्र में मानसून के दौरान एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की स्थायी टीम तैनात की जाए, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर लोगों की जान बचाई जा सके।
फिलहाल प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है और हाईवे को पूरी तरह सुचारु करने का कार्य जारी है। लेकिन मानसून की शुरुआत से पहले ही सामने आए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की तैयारियों और स्थायी सुरक्षा कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
