गैरसैंण के कुनिगाड़ क्षेत्र में गुलदार के लगातार हमले में
दो ओर गोवंश की मौत,गौशाला में दो दिन बाद दोबारा घुसा गुलदार बछडे को मारा।
मेहलचौरी न्याय पंचायत के अंतर्गत 12 घटनाओं में 21 गौवंश की मौत,विभाग खानापूर्ति तक सिमटा तो जनप्रतिनिधियों ने साधा मौन।
कुनीगाड (गैरसैंण)-11 फरवरी 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला
विकासखंड गैरसैंण के अंतर्गत पिछले डेढ़ माह से जारी गुलदार का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है । ताजा घटनाक्रम में मंगलवार की रात गुलदार ने कुनीगाड क्षेत्र के किशन सिंह बिष्ट की गौशाला में दोबारा से घुसकर एक बछड़े को अपना निवाला बना डाला ,जबकि बीते शनिवार को ही इसी गौशाला में गुलदार ने दूध देने वाली गाय को मार डाला था। दिनों-दिन बढ़ती गुलदार की घटनाओं को लेकर जहां विभाग सिर्फ खानापूर्ति तक ही सिमटा हुआ है, वहीं गुलदार की सक्रियता को लेकर मौन दिख रही जनप्रतिनिधियों का भी कोई बड़ा दबाव अब तक धरातल पर नहीं दिखाई दिया है। जिसका खामियाजा पशुपालकों को भुगतना पड़ रहा है। आए दिन जहां गुलदार गौशालाओं का दरवाजा तोड़कर गोवंश को अपना निवाला बना रहा है। वहीं,गुलदार की खूंखार होती प्रवृत्ति को देखते हुए निकट भविष्य में मनुष्यों पर हमले की संभावनाएं भी बढ़ती जा रही हैं।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष 25 दिसंबर से गढ़वाल -कुमाऊं के इस सीमांत क्षेत्र में गुलदार के हमले की घटनाओं का सिलसिला शुरू हुआ था ।जिसके बाद से डेढ़ माह में अब तक कुल 15 घटनाओं में 29 मवेशी मारे गए हैं ,सभी घटनाओं में गुलदार गौशालाओं का दरवाजा तोड़कर गोवंश को अपना निवाला बन रहा है।वहीं विभिन्न गांवों से मिल रही दैनिक सूचनाओं के आधार पर अब तक सैकडों पालतू कुत्ते गुलदार का निवाला बन चुके हैं। मेहलचोरी न्याय पंचायत के अंतर्गत घटित 12 घटनाओं में अब तक 21 मवेशी मारे जा चुके हैं। जबकि न्याय पंचायत के ही अंतर्गत 5 ग्राम पंचायतों के कुनीगाड क्षेत्र में महज 2 वर्ग किलोमीटर में ही अब तक 8 घटनाओं में 14 मवेशी गुलदार के शिकार हुए हैं। मंगलवार को कुनीगाड तल्ली गांव के किशन सिंह बिष्ट का बछड़ा शनिवार को हुए हमले में जान बचाकर रात को गधेरे की तरफ भाग गया था,इसके बाद सुबह परिजन बछड़े को ढूंढ कर लाये,घायल बछडे की दवा-पानी करने के दौरान महज दो दिन बाद ही पहले से घायल बछड़े को गुलदार ने अपना निवाला बना लिया।
घटना को लेकर विभागीय कर्मचारी जहां गौशालाओं के कमजोर दरवाजे होने का हवाला दे रहे हैं ,वहीं ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से इन्हीं दरवाजे लगे गौशालाओं में मवेशी रह रहे हैं ,तो पहले ऐसी घटनाएं देखने को नहीं मिली।बढ़ती घटनाओं से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है की गुलदारों की संख्या सरकारी विभाग के आंकड़ों से कई गुना ज्यादा बढ़ गई है। जिसकी जानकारी खुद विभाग को भी नहीं है। दिनों-दिन बढ़ते मामलों के बावजूद जहां विभागीय अधिकारी कागजी खानापूर्ति ओर राज्य स्तरीय अधिकारीयों के आदेशों का पालन करने तक ही सिमटे हुए हैं ,वहीं गुलदार के हिंसक मामलों की संवेदनशीलता को लेकर जनप्रतिनिधियों का कोई बड़ा दबाव अभी तक धरातल पर देखने को नहीं मिला है। जिसका खामियाजा पशुपालन कर आजीविका चलाने वाले गरीब परिवारों को झेलना पड़ रहा है ,जिसका सीधा असर उनकी आर्थिक पर पड़ रहा है, वहीं मवेशियों की हमले में मौत के बदले मिलने वाला मुआवजा भी दो-तीन साल बाद ही मिल पाता है,जिससे पशुपालकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
अब तक पकड़ में आया एक गुलदार⤵️
मेहलचौरी न्याय पंचायत के अंतर्गत गुलदार की 12 घटनाओं में 21 गौवंश के मारे जाने के बाद अब तक महज एक गुलदार ही वन विभाग की पकड में आया है।जिसको लेकर विभाग एक ही गुलदार को सारी घटनाओं का जिम्मेदार मानकर खुद की पीठ थपथपाने पर लगा है। जबकि ग्रामीणों की सूचना के अनुसार आगरचट्टी से कुनीगाड व रोहिडा क्षेत्र के 7 से 8 वर्ग किलोमीटर के दायरे में ही 3 दर्जन से ज्यादा गुलदार सक्रिय हैं।गुलदारों की बढती संख्या मवेशियों के साथ ही ,भविष्य में मानव जीवन के लिए बडा खतरा बनने की संभावना है।
