सीमावर्ती गांवों में स्वरोजगार की नई किरण: भारतीय सेना की ‘यार्न्स ऑफ योर’ पहल।

सीमावर्ती गांवों में स्वरोजगार की नई किरण: भारतीय सेना की ‘यार्न्स ऑफ योर’ पहल।

चमोली- 20 अप्रैल 2026

उत्तराखंड की देवभूमि के सीमावर्ती गांवों में अब बुनकरों के हुनर को नई पहचान मिलने जा रही है। भारतीय सेना की ‘सूर्य कमान’ द्वारा शुरू की गई महत्त्वाकांक्षी योजना ‘यार्न्स ऑफ योर’ (Yarns of Yore) के अंतर्गत नवनिर्मित बुनकरशालाओं का उद्घाटन रुचिरा सेनगुप्ता, क्षेत्रीय अध्यक्षा सूर्या कमान द्वारा किया गया। यह पहल न केवल स्थानीय कला को संरक्षित करने का प्रयास है, बल्कि सीमांत क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

​प्राचीन कौशल और आधुनिक तकनीक का संगम:- भारतीय सेना ने सीमावर्ती गांवों के पारंपरिक बुनकरों के प्राचीन कौशल को आधुनिक दौर के डिजाइन और तकनीक से जोड़ने का बीड़ा उठाया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाना और उन्हें स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान करना है। सेना का लक्ष्य है कि यहाँ की हस्तकला पहले भारत और फिर वैश्विक स्तर पर अपनी चमक बिखेरे।

इस मुहिम की शुरुआत सूर्य कमान द्वारा भारत के प्रथम गाँव माणा और नीति जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों को जोड़कर की गई थी। दिसंबर 2024: सबसे पहले घिन्गरान गाँव में बुनियादी ढांचे (बुनकरशाला) का निर्माण किया गया। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए अब न्यू चमेली और रोली ग्वाड़ गांवों में भी बुनकरशालाओं का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय महिलाओं को बुनाई और कढ़ाई के लिए एक सुरक्षित, एकांत और आधुनिक वातावरण प्राप्त होगा। इसी के साथ मुख्य अतिथि महोदया ने ‘यार्न्स ऑफ योर’ की कमर्शियल वेबसाइट को भी प्रारंभ किया जिससे न की केवल उत्तराखंड क्षेत्र बल्कि पूरे देश एवं विश्व भर में भी यार्न्स ऑफ योर’ की बुनकरशालाओं मे बने हस्त शिल्प उत्पाद को सही ग्राहकों तक पहुंचाया जा सके।

सेना और जनता की अटूट साझेदारी:-इस परियोजना की सफलता में ‘lbex Brigade और अन्य सहयोगी संस्थाओं का विशेष योगदान रहा है। मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में इसे “सेना और जनता के बीच साझेदारी की एक मिसाल” बताया। उन्होंने स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे इस योजना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें, क्योंकि जन-भागीदारी ही इस परियोजना की असली ताकत है। इस पहल के चलते महिलाओं में आत्मविश्वास की भावना आई है | वे केवल गृहिणी नहीं, बल्कि कारीगर और उद्यमी के रूप में उभर रही है।

​भारतीय सेना के सहयोग के तहत इस आजीविका आधारित पहल से न केवल महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बढ़ाकर पलायन की समस्या को भी उल्टा मोड़ दिया जाने की कोशिश की जा रही है। जब लोगों को अपने गाँव मे सम्मानजनक और स्थाई रोजगार मिलेगा, तो वे शहरों की ओर पलायन करने के बजाय वापस अपने गाँव लौटेंगे – और यह रिवर्स माइग्रेशन ग्रामीण जीवन मे नई ऊर्जा और स्थायित्व लाएगा | ‘यार्न्स ऑफ योर’ जैसे कदम न केवल महिलाओं के हाथों को हुनरमंद बना रहे है, बल्कि पूरे समुदाय को आत्मनिर्भरता, सामूहिकता समरसता और आर्थिक मजबूती की ओर ले जा रहे हैं। यह एक ऐसा कदम है जिससे गाँव, समाज और राष्ट्र तीनों को समान रूप से लाभ मिलेगा। भारतीय सेना के सूर्या वॉरियर्स की इस पहल से उत्तराखंड की बेटी अब घर नहीं, पूरे प्रदेश की उम्मीद बुन रही है।

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