क्षेत्र की उभरती आवाज के असमय खामोश होने से गम में डूबा गैरसैंण,2 दिन बाद ही बिटिया के नामकरण की थी तैयारी।

क्षेत्र की उभरती आवाज के असमय खामोश होने से गम में डूबा गैरसैंण,2 दिन बाद ही बिटिया के नामकरण की थी तैयारी।

70 हजार समर्थकों वाले गैरसैंण के पहले इनफ्लुएंसर थे हिमांशु

सप्ताहभर पूर्व ही गैरसैंण की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुधारने की कर रहे थे मांग।

गैरसैंण:-04 जुलाई 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला

ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण की उभरती आवाज के रूप में पहचान बनाने वाले 26 वर्षीय युवा हिमांशु पंवार के आकस्मिक निधन से गैरसैण क्षेत्र गम में डूब गया है।गैरसैंण नगर क्षेत्र के सलियाण वार्ड के डांगीधार निवासी हिमांशु पंवार पुत्र महेंद्र पवार का शनिवार सुबह हृदय गति रुकने से निधन हो गया है.जिसकी सूचना मिलते ही पूरे नगर क्षेत्र में शोक की लहर छा गई।

शनिवार सुबह 3 बजे अचानक तबियत बिगड़ने पर दिल्ली में स्वास्थय क्षेत्र में सेवारत छोटे भाई प्रशांत ने सीपीआर देकर बड़े भाई हिमांशु को बचाने की हर संभव कोशिश की,लेकिन तबियत लगातार बिगडने पर परिजनों द्वारा सुबह 6 बजे उन्हें 2 किलोमीटर दूर गैरसैंण अस्पताल ले लाने के दौरान ही हिमांशु ने दम तोड़ दिया।26 वर्षीय युवा के निधन की सूचना मिलते ही नगर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई ,वहीं परिवारजनों पर मानो दुखों का पहाड़ टूट गया। वे अपने पीछे माता-पिता ,बूढी दादी ,बहन ओर छोटे भाई सहित 14 दिन की दूधमुंही बच्ची को अपनी पत्नी बबीता के भरोसे छोड़ गए हैं।

नियति की क्रुरता देखिए की अब 6 जुलाई को हिमांशु अपनी पहली संतान के रूप में बिटिया के नामकरण की तैयारी धूमधाम से कर रहे थे,लेकिन दो दिन पहले ही सारी तैयारियों को अधूरा छोड़कर इस दुनिया से चले गए।

गैरसैंण वाला सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर के रूप में खासी प्रसिद्धि पा चुके हिमांशु पंवार के निधन की सूचना पाते ही, उनके सोशल मीडिया प्रशंसको में भी शौक की लहर छा गई जिससे आज दिन भर सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि व्यक्त करने वालों की पोस्टें वायरल होती रही।

सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म पर लगभग 70 हजार फोलोवर तक पंहुचने वाले हिमांशु पंवार गैरसैंण क्षेत्र के पहले इनफ्लुएंसर भी हैं। हिमांशु पंवार क्षेत्र की समस्याओं के साथ ही क्षेत्र की उपलब्धियों,सामाजिक व सांस्कृतिक आयोजनों व सरकारी आयोजनों ओर योजनाओं के प्रचार -प्रसार कर लेकर भी खासे सक्रिय रहते थे।एक दिन पहले ही उन्होंने बरसात के मौसम में पहाड़ों में उगने वाली पौष्टिक लिंगुडा सब्जी को स्वास्थय के लिए उपयोगी बताया था ,वहीं सप्ताहभर पर पूर्व ही लंबे समय से गैरसैंण क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुधारे जाने की बात उठाई थी।

बेटे के आकस्मिक निधन पर गैरसैंण बाजार में लंबे समय तक परचून की छोटी सी दुकान चलाने वाले पिता महेंद्र सिंह पंवार कहते हैं कि नियति ने उनके साथ क्रूर खेल खेला है,बेहद गरीबी में बच्चों को पालकर बड़ा किया,अब सहारा बनने के समय पर बड़ा बेटा साथ छोड़ कर ही चला गया,इतना कहते ही उनकी आंखें भर आई। बचपन के साथी दीपक रावत कहते हैं कि,हिमांशु स्कूली दिनों से ही बेहद गंभीर ओर संवेदनशील व्यवहार का व्यक्ति रहा है,समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारीयों को समझते हुए वह समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाते रहे हैं।

उनके आकस्मिक निधन पर विधायक कर्णप्रयाग अनिल नौटियाल,राज्य मंत्री रामचंद्र गौड,प्रमुख गैरसैंण दुर्गा रावत,नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन भंडारी,व्यापार संघ अध्यक्ष सुरेंद्र बिष्ट,भाजपा के सतीश लखेडा,टीका प्रसाद मैखुरी ,कांग्रेस के मुकेश नेगी,हरिकृष्ण भट्ट,उक्रांद के आशीष नेगी,जिला पंचायत सदस्य सुरेश बिष्ट,सभासद मंगल नारायण पंवार,लोकगायक मृणाल रतूडी, लोक कलाकार पवन लौबियाल ,प्रसिद्ध शिकारी लखपत सिंह रावत,सहित पत्रकार संगठन, टैक्सी यूनियन ,व्यापार संगठन ,प्रधान संगठन ,मेला समिति मेहलचौरी, गैरसैंण ,पंचाली माईथान नंदासैंण व आदिबद्री ,खनसर विकास संघर्ष समिति, महिला सशक्तिकरण संगठन ,शिक्षक संगठनों व विभिन्न विद्यालयों द्वारा भी उनके आकस्मिक निधन पर गहरी संवेदनाएं व्यक्त की ।

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