बदरीनाथ धाम में स्वच्छता के साथ आय का नया मॉडल,एक सप्ताह में 8 टन अजैविक कचरे के निस्तारण से 84 हजार रुपये से अधिक की आय की अर्जित।

बदरीनाथ धाम में स्वच्छता के साथ आय का नया मॉडल,एक सप्ताह में 8 टन अजैविक कचरे के निस्तारण से 84 हजार रुपये से अधिक की आय की अर्जित।

चमोली-30 अप्रैल 2026

बदरीनाथ धाम में प्लास्टिक कचरे के निस्तारण को आय के साधन में बदलते हुए नगर पंचायत ने एक सराहनीय पहल की है। बीते वर्ष जहां करीब 230 टन कचरे का निस्तारण किया गया था, वहीं इस वर्ष चारधाम यात्रा शुरू होने के मात्र एक सप्ताह में ही 8 टन अजैविक कचरे के निस्तारण से 84 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की गई है।

धाम की स्वच्छता का जिम्मा नगर पंचायत बदरीनाथ के पास है, जो पैदल मार्गों, सड़कों और शौचालयों की साफ-सफाई के साथ कूड़ा प्रबंधन की समुचित व्यवस्था भी देखती है। नगर पंचायत द्वारा जैविक और अजैविक कचरे को अलग-अलग कर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया जा रहा है।

पर्यावरण मित्रों के सहयोग से जहां जैविक कचरे से खाद तैयार की जा रही है, वहीं प्लास्टिक कचरे को ब्लॉक में परिवर्तित कर उसका विपणन किया जा रहा है। इस पहल से न केवल स्वच्छता को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि नगर पंचायत को अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो रही है।

नगर पंचायत द्वारा अर्जित आय का उपयोग संसाधनों के विकास और अन्य आवश्यक कार्यों में किया जा रहा है। बदरीनाथ का यह मॉडल अब जनपद की अन्य नगर पालिकाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनता जा रहा है।

वहीं दूसरी और शहरी विकास विभाग और नगर पालिका परिषद गोपेश्वर के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को गोपेश्वर में क्षमता विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान विषय विशेषज्ञों की ओर से नगर पालिका और पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों को विभिन्न कार्यों में क्षमता विकास और तकनीक के उपयोग से कार्य को सुगम और सरल बनाने की जानकारी दी।

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर में आयोजित क्षमता विकास कार्यशाला में जनपद चमोली और रुद्रप्रयाग की नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारियों के साथ ही कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला का उद्देश्य स्वच्छता सर्वेक्षण के मानकों और दिशा निर्देशों की जानकारी देना और पालिका व पंचायतों की क्षमता विकास करना रहा। इस दौरान विषय विशेषज्ञों की ओर से अधिकारी और कर्मचारियों को स्वच्छता संबंधी गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन, कचरा प्रबंधन, नागरिक सहभागिता, स्वच्छता मानकों का मूल्यांकन तथा नवीन तकनीकों के उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी गई। कार्याशाला में स्वच्छता से जुड़ी बेहतर आदतों की जानकारी देते हुए नगर क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के विषय में भी जानकारी दी गई।

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