बागेश्वर में लोक निर्माण विभाग का गजब कारनामा,पहले बारिश में किया डामरीकरण विरोध के बाद उखाड़ी सड़क।
बागेश्वर:-11 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में लोक निर्माण विभाग का एक बेहद हैरान करने वाला कारनामा सामने आया है। यहाँ कांडा–रावतसेरा–बांसपटान मोटर मार्ग पर विभाग द्वारा घोर लापरवाही बरतते हुए मूसलाधार बारिश के बीच ही डामरीकरण का काम कर दिया गया। हालांकि, सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होने और स्थानीय जनता व टैक्सी चालकों के उग्र विरोध के बाद, विभाग को बैकफुट पर आना पड़ा। मामले को शांत करने के लिए अब खुद विभाग ही जेसीबी मशीन लगाकर इस नवनिर्मित सड़क को उखाड़ने में जुट गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में मौसम खराब था और भारी बारिश हो रही थी। डामरीकरण के तकनीकी मानकों के अनुसार, गीली सतह और कम तापमान में तारकोल का काम नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे डामर सड़क पकड़ नहीं पाता। इसके बावजूद, लोनिवि के ठेकेदार ने आनन-फानन में बारिश के बीच ही सड़क पर डामर बिछाना शुरू कर दिया। सड़क निर्माण के इस अनोखे तरीके को देखकर स्थानीय लोग और रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले टैक्सी चालक भड़क गए। उन्होंने मौके पर ही काम रुकवा कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि सरकारी धन का इस तरह दुरुपयोग करना और तय मानकों की धज्जियां उड़ाना सीधे-सीधे भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है।
विभाग ने जन आक्रोश के आगे घुटने टेकते हुए जेसीबी से डामर की परत को उखाड़ना शुरू किया, तो जनता के सवाल और तीखे हो गए। स्थानीय लोगों का पूछना है कि,जब मौसम डामरीकरण के बिल्कुल भी अनुकूल नहीं था, तो यह काम किसके दिशा-निर्देशों पर कराया जा रहा था? कहा कि,अगर यह निर्माण कार्य वाकई सरकारी मानकों के अनुरूप और सही था, तो इसे उखाड़ने की नौबत क्यों आई और बारिश में बिछाए गए डामर और अब उसे उखाड़ने में जो सरकारी पैसा पानी की तरह बहाया गया,उसकी वसूली किससे की जाएगी?
ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में कहा कि सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि इसमें जनता की गाढ़ी कमाई का टैक्स शामिल होता है। उन्होंने लोनिवि बागेश्वर के उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी इंजीनियरों और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और उनकी जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।इस पूरे घटनाक्रम ने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली और साख पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जनता विकास कार्यों में किसी तरह की बाधा नहीं चाहती, बल्कि वे समय पर एक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सड़क की उम्मीद करते हैं। विभागीय अधिकारियों की यह बुनियादी जिम्मेदारी है कि काम शुरू होने से पहले मौसम की स्थिति, तकनीकी मानकों और सामग्री की गुणवत्ता की पूरी पड़ताल की जाए, ताकि जनता को बेहतर सुविधा मिले और राजस्व का नुकसान न हो।
मामले की गंभीरता को देखते हुए लोनिवि बागेश्वर के अवर अभियंता मो. अहमद ने सफाई दी है। उन्होंने कहा, “भारी बारिश के बीच किए गए डामरीकरण के मामले को विभाग ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। संबंधित ठेकेदार को इस घोर लापरवाही के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। मानकों के विपरीत जितनी भी सड़क बनाई गई थी, उसे जेसीबी से पूरी तरह हटाया जा रहा है। भविष्य में यदि ऐसी कोई भी लापरवाही दोबारा पाई गई, तो संबंधितों के खिलाफ कठोरतम वैधानिक व दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।फिलहाल क्षेत्र में यह मामला भारी चर्चा का विषय बना हुआ है।
