द्विगतै वैशाख पर सीमान्त दुर्गा देवी मंदिर में लगेगा भव्य मेला,इस बार गैरसैंण के मुख्य मंदिर में नहीं होगा “घटरियौडा मेला”

द्विगतै वैशाख पर सीमान्त दुर्गा देवी मंदिर में लगेगा भव्य मेला,इस बार गैरसैंण के मुख्य मंदिर में नहीं होगा “घटरियौडा मेला”

धारगैड में होगा काल नेगी कौथिक का आयोजन।

मेहलचौरी (गैरसैंण)-13 अप्रैल 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला.

विकासखंड गैरसैंण के अंतर्गत सीमांत कुनीगाड क्षेत्र के दुर्गा देवी मंदिर में लगने वाला पौराणिक बैसाखी मेले का इस बार भी भव्य आयोजन किया जाएगा । लेकिन गैरसैंण में बैसाखी पर लगने वाले प्रसिद्ध “घटरियौडा” मेले का आयोजन इस बार नहीं किया जाएगा । दरअसल आयोजक परिवारों में दो सदस्यों की आकस्मिक मृत्यु के पश्चात गंगा माई मंदिर मंदिर में आयोजित होने वाला मेला इस बार स्थगित रहेगा। लेकिन इसी मेले के अंतर्गत धारगैड में होने वाले “काल नेगी कौथिक” का आयोजन पूर्व की भांति किया जाएगा ।
जनपद चमोली व अल्मोड़ा के सीमान्त दुर्गा देवी मंदिर में बैशाखी के अवसर पर 15 अप्रैल को आयोजित होने वाले मेले में कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल ओर सल्ट विधायक महेश जीना बतौर मुख्य अतिथि शामिल रहेंगे।

इस बार मेलास्थल तक पंहुचना जहां अल्मोडा जनपद के मेलार्थियों के लिए आसान होगा जिसका कारण देघाट क्षेत्र से दुर्गा देवी मंदिर को जोड़ने वाली सड़क की खुदाई का काम पूरा कर लिया गया है ,जबकि जनपद चमोली की तरफ से सडक निर्माण न होने से मेलार्थियों को फिलहाल अभी भी डेढ़ से दो किलोमीटर की पैदल चढ़ाई ही नापनी पड़ेगी।

ग्रीष्मकालीन राजधानी के गैरसैंण नगर में दो गते बैसाख को लगने वाले घटरियौडा नाम से जाने जाने वाला प्रसिद्ध मेला इस बार स्थगित रहेगा जबकि धारगैड में 1 गते को होने वाले शेष आयोजन पूर्व की भांती आयोजित किये जाएंगे। दरअसल मेले के मुख्य आयोजक गैरसैंण के गैड गांव के गैडी परिवारों में दो सदस्यों की कुछ समय पूर्व आकस्मिक मृत्यु हो गयी थी। जिनमें सत्य प्रकाश गैड़ी व हीरा प्रसाद गैड़ी की माता जमुना देवी पत्नी स्वर्गीय हरिदत्त के साथ ही ,गंगा माई मंदिर के मुख्य पुजारी जनार्दन पुजारी ( गैडी) के अनुज लक्ष्मण पुजारी का भी कुछ समय पूर्व आकस्मिक निधन हो गया था. जिसके चलते मुख्य मेला स्थगित किया गया है।

मेले का पौराणिक महत्व एवं इतिहास बताते हुए प्रवक्ता एवं व्यास जी जगदीश ढौंडियाल ने बताया कि गैड गांव स्थित मां गंगा माई मंदिर में पार्वती माता का निवास स्थल माना जाता है,वहीं नजदीकी गांव धारगैड़ में भगवान शंकर का मंदिर स्थापित है. मान्यताओं के अनुसार ग्रीष्म ॠतु का आगमन ओर घर में नये अनाज के भंडार भरने की खुशी में भगवान शंकर और पार्वती के मिलन को प्रतिकात्मक रूप से विवाह संबंधी अनुष्ठान के साथ पूर्ण कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की जाती है। दो दिवसीय मेले में एक दिन धारगैड के शिव मंदिर तो दूसरे दिन गैड गांव के गंगा माई मंदिर में मेले का आयोजन होता है,जिसमें धारगैड गांव के वृद्ध व गैड गांव की वृद्धा प्रतिकात्मक रूप से भगवान शिव व पार्वती के रूप में भाग लेकर दैवीय नृत्य के साथ खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं। धारगैड मंदिर में भगवान शंकर की स्थापना धुनारघाट के काल नेगी परिवारों द्वारा बताई जाती है ,जिसके चलते इस मेले को “काल नेगी कौथिक” के नाम से भी जाना जाता है। वहीं पूर्व में घराट (पनचक्की) की घुमने वाली लकड़ी की आकृति के काष्टदंड को भगवान शिव के रूप में पूजा जाता था,जिसके चलते दो दिवसीय मेला आज भी घटरियौडा नाम से प्रच्चलित है। मेले के दौरान गंगा पंरपराओं के अनुरूप हर साल 1 गते को धारगैड मंदिर की शिव डोली धुनारघाट के पंडवाघाट संगम पर पंहुचती है,जिसमें बडी संख्या में विभिन्न गांवों के ग्रामीण शामिल होते हैं। यहां रामगंगा नदी में स्नान के साथ ही भगवान शिव का मंगल स्नान भी किया जाता है। जिसके बाद धुनारघाट स्थित मां दुर्गा के मंदिर में दर्शन कर पूजा पाठ कर डोली वापस धारगैड मंदिर पंहुचती है।इस दौरान गंगा माई मंदिर में मां पार्वती की पूजा पाठ व विवाह संबंधी पंरपराओं का गुप्त रूप से आयोजन किया जाता है। अगले दिन दो गते को धारगैड से शिव बारात बुढे व्यक्ति ओर डोले के साथ धूमधाम से आधा किलोमीटर दूर गैड गांव पंहुचती है,जहां माता पार्वती ओर भगवान शंकर के रूप में बुढे ओर बुढ़िया के विवाह अनुष्ठान की पंरपरा को पूर्ण किया जाता है,जिसमें सात फेरों के लिए मंदिर की परिक्रमा की जाती है,जिसके साथ ही पुजारी जनार्दन पुजारी द्वारा मेला पूर्ण होने की घोषणा की जाती है। मेले का मुख्य आकर्षण बुढे ओर बुढिया का विवाह देखने हजारों की संख्या में पंहुचने वाले श्रद्धालु मंदिर में दर्शनों के साथ सुख शांति का आशीर्वाद लेते हैं,जिसमें गढवाल -कुमाऊं के आदिबद्री,नागचूलाखाल ,माईथान,कुनीगाड,रोहिडा,मेहलचौरी,चौखुटिया व देघाट क्षेत्र से मेलार्थी की भारी भीड लगती है।

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