वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्मृति मेले में सहभागिता हेतु जनमानस से अपील,12 जून को दूधातोली के कोदियाबगड़ में लगेगा मेला।

वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्मृति मेले में सहभागिता हेतु जनमानस से अपील,12 जून को दूधातोली के कोदियाबगड़ में लगेगा मेला।

गैरसैंण:- 11 जून 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला।

पेशावर कांड के महानायक एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की स्मृति में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला मेला इस वर्ष भी 12 जून को उनकी समाधि स्थल कोदियाबगड़, दूधातोली में आयोजित किया जाएगा। इस आशय की जानकारी देते हुए गैरसैंण नगर पंचायत के अध्यक्ष मोहन भंडारी ने क्षेत्रवासियों से मेले में शामिल होने का आह्वान किया है।

उल्लेखनीय है की गैरसैंण नगर से कुल 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कोदियाबगड़ का बुग्याल समुद्रतल से 3100 मीटर की ऊँचाई वाले दुधातोली पर्वतमाला का बेहद रमणीक स्थल है ।कभी सैकडों की संख्या में अपने पालतु पशुओं के साथ यहां रहने वाले पशुपालकों द्वारा दुग्ध उत्पादन का केन्द्र होने के चलते इसे दुधातोली (दुध की तौली या बर्तन ) नाम दिया गया था।

गैरसैंण से 16 किलोमीटर दूर भराड़ीसैंण व दो किलोमीटर वन विभाग की सडक से सफर करने के बाद 6 किलोमीटर की खडी चढ़ाई पार कर यहां पँहुचा जाता है.चमोली ,अल्मोडा व पौडी जनपदों के इस सीमांत क्षेत्र कोदियाबगड़ में चौमास (बरसात के चार माह ) के दौरान यहां छपरों (कच्चे मकान ) में रहने वाले पशुपालकों द्वारा सदियों से मेले का आयोजन किया जाता रहा है ,जिसमें गैरसैंण, थलीसैंण व स्यालदे ब्लाकों के पशुपालक शामिल रहते हैं। बदलते समय के साथ पशुपालन कम होने से मेले की रंगत भी फंकी पडती गयी । लेकिन पिछले साल से मेले की खौयी रंगत लोटाने को गैरसैंण नगर पंचायत के अध्यक्ष सहित स्थानीय ग्रामीणों ने प्रयास शुरू किये हैं ।इसी कडी में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के समधी स्थल पुरानी जीर्ण शीर्ण मूर्ति के स्थान पर नई मूर्ती स्थापित की गयी है.

मेले को पूर्व की भांती लोकप्रिय बनाने के लिए प्रयासरत मोहन भंडारी ने कहा की वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का जीवन को प्रेरणादाई रहा है.जहां एक सैनिक के रूप में उनके अंदर अद्वितीय साहस एंव देशभक्ति का जज्बा था,तो वहीं दूसरी तरफ सामाजिक जीवन में उनकी जनसेवाएं हमेशा अविस्मरणीय रहेंगी.12 जून को श्रद्धांजली सभा के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा की अन्याय और दमन के विरुद्ध खड़े होकर गढवाली जी ने मानवता एवं राष्ट्रहित का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया था.उनके आदर्शों को स्मृति मेले के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।

वीर चंद्र गढवाली की वीरगाथा⤵️

जनपद पौडी गढवाल के थलीसैंण ब्लाक के मासौं गांव के रहने वाले चन्द्र सिंह नेगी प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना की प्रसिद्ध ‘रॉयल गढ़वाल राइफल्स’ का हिस्सा थे । 23 अप्रैल 1930 को पेशावर में निहत्थे पठानी स्वतंत्रता सेनानियों पर अंग्रेजों ने गोली चलाने का आदेश दिया था।तब उन्होंने चंद्र सिंह ने अपनी देशभक्ति दिखाते हुए निहत्थे हमवतन क्रांतिकारियों पर गोली चलाने से साफ इनकार कर दिया। जिसके बाद उनको ब्रिटिश सेना से बर्खास्त कर दिया गया. उनके इस क्रांतिकारी फैसले के बाद उन्हें वीर चंद्र सिंह गढ़वाली नाम से जाना जाने लगा। सन् 1979 में अपनी मौत से पहले उन्होंने पशुपालकों के प्रिय स्थल कोदियाबगड़ में अपनी समाधी स्थापित करने की मंशा जताई थी।

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