बीमार को चार किलोमीटर डोली से लाकर महिलाओं ने दिखाई पहाड़ की हकीकत।

बीमार को चार किलोमीटर डोली से लाकर महिलाओं ने दिखाई पहाड़ की हकीकत।

सड़क के अभाव में एक ग्रामीण ने फिर गंवाई जान,25 वर्षों से सड़क की बाट जोह रहे तीन गांव।

मेहलचौरी (गैरसैंण)-22 सितंबर 2026
रिपोर्ट-प्रेम संगेला.

पहाड़ में सड़क सुविधा का अभाव किस तरह लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है, इसकी तस्वीर विकासखंड गैरसैंण के कुनीगाड़ क्षेत्र के गोगनाणी गांव में देखने को मिली। बीते दिनों गांव के 61 वर्षीय बीमार बलवंत सिंह को दर्जनभर महिलाओं ने डोली में बैठाकर करीब चार किलोमीटर दूर सड़क मार्ग तक पहुंचाया। उबड़-खाबड़ और जंगल के रास्ते पर महिलाओं द्वारा डोली को कंधा लगाकर चार किलोमीटर की दूरी तय करने की यह घटना इन दिनों पूरे उत्तराखंड में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह घटना जहां पहाड़ी गांवों में सड़क सुविधा की बदहाली को उजागर करती है, वहीं मातृशक्ति की कर्मठता और विषम परिस्थितियों से जूझने की क्षमता का भी उदाहरण है।

रात में नहीं मिल सका साधन,अगले दिन महिलाओं ने संभाला मोर्चा:-

कुनीगाड़ क्षेत्र की कोठा ग्राम पंचायत से करीब चार किलोमीटर पैदल दूरी पर स्थित गोगनाणी तोक निवासी 61 वर्षीय पेंटर बलवंत सिंह पुत्र हुकम सिंह पेंटिंग का कार्य कर आजीविका चलाते थे। गांव में पत्नी देवकी देवी ओर छोटे दिव्यांग बेटे के साथ रहने वाले बलवंत सिंह की बीते दिनों अचानक तबीयत बिगड़ गई। गांव के अधिकांश पुरुष रोजगार के सिलसिले में बाहर होने के कारण रात के समय उन्हें अस्पताल नहीं ले जाया जा सका।

अगले दिन गांव की दर्जनभर महिलाओं ने बलवंत सिंह को डोली में बैठाया और किसी तरह करीब चार किलोमीटर दूर कोठा बैंड तक पहुंचाया। इसके बाद नजदीकी गांवों के रिश्तेदार उन्हें चौखुटिया अस्पताल ले गए। चिकित्सकों ने जांच के बाद हृदय संबंधी समस्या बताते हुए उन्हें बेस अस्पताल अल्मोड़ा रेफर कर दिया। परिजनों के अनुसार उपचार में देरी के चलते बलवंत सिंह की मौत हो गई।

कष्ट उठाना हमारी नियति बन गई’:-

बलवंत सिंह की असमय मौत से आहत उन्हें सड़क तक पहुंचाने वाली महिलाओं में शामिल गीता,धन्ना,शांता,कुसमा,छुमा,मंजू,मीना,पूजा,गंगा देवी,पुष्पा देवी,कमला,राधा,दीपा और मधु ने रूंधे गले से कहा कि कष्ट उठाना हमारी नियति बन गई है,लेकिन इससे सरकारों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।

गांव के बुजुर्ग धर्म सिंह और दान सिंह कहते हैं कि उनकी पैदाइश आजादी के आसपास की है, लेकिन सड़क सुविधा के मामले में उनके लिए आज भी गुलामी का दौर ही चल रहा है।

सही समय पर उपचार न मिलने से हो रही मौते:-

मृतक बलवंत सिंह नेगी के छोटे भाई कैप्टन विक्रम सिंह नेगी का कहना है कि पिछले एक वर्ष में समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण तीन लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि गांव को सड़क से जोड़ने की मांग पिछले 25 वर्षों से की जा रही है, लेकिन सड़क अभी भी फाइलों में अटकी हुई है।

कुनीगाड़ क्षेत्र के डॉ. झगड़ सिंह का कहना है कि क्षेत्र में अधिकांश मौतें समय पर उपचार नहीं मिल पाने के कारण हो रही हैं। यदि गांवों तक सड़क सुविधा होती तो गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था और कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

तीन गांवों की करीब 400 आबादी सड़क से वंचित:-

गौरतलब है कि कुनीगाड़ क्षेत्र के सड़क सुविधा से वंचित गोगनाणी, दमदड़ और तिमिलपानी गांव चमोली जनपद के सीमांत गांव हैं। गोगनाणी में करीब 30, दमदड़ में 10 और तिमिलपानी में लगभग 20 परिवार निवास करते हैं। तीनों गांवों की कुल आबादी करीब 400 के आसपास है।

इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए दो प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इनमें कोठा से दमदड तक करीब चार किलोमीटर सड़क लोक निर्माण विभाग तो निगलाणी से ऊपरी गांवों को जोडते हुए तीन किलोमीटर सड़क मार्ग पीएमजीएसवाई के पास प्रस्तावित है। हालांकि वन विभाग की स्वीकृति के लिए अटकी फाइलों को आगे बढ़ाना विभागों के लिए चुनौती बना हुआ है।

25 अगस्त को हुआ संयुक्त निरीक्षण:-

मामले में बीते 25 अगस्त को केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग गोपेश्वर के मुख्य वन संरक्षक ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ कोठा–दमदड़ प्रस्तावित सड़क का संयुक्त निरीक्षण किया था। ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि अब वर्षों पुरानी सड़क की मांग पूरी होने की दिशा में कदम बढ़ेगा, लेकिन वन विभाग की ओर से लोक निर्माण विभाग को भेजे गए जवाबी पत्र के बाद मामला फिर उलझता दिखाई दे रहा है।

वन विभाग ने प्रस्तावित समरेखण में आने वाले पेड़ों के लिए लगाए गए पिलरों सहित सड़क के दायरे में आने वाली आरक्षित वन भूमि की स्थिति और मलबा निस्तारण के लिए चयनित स्थलों की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग की ओर से जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं होने को लेकर भी आपत्ति जताई गई है,ऐसे में करीब 25 वर्षों से सड़क की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों के लिए सड़क निर्माण का मामला एक बार फिर विभागीय फाइलों में ही घूमता नजर आ रहा है।

अधिकारियों का क्या है कहना:-

अधिसाशी अभियंता लोनिवि खंड गैरसैंण आशुतोष कुमार ने कहा कि,वन विभाग के साथ संयुक्त सर्वे के बाद कुछ बिन्दुओं पर आपत्ति की गयी है। जिनके समाधान के लिए विभाग द्वारा आवश्यक उपकरणों की खरीद भी कर ली गयी है। जल्द ही वन विभाग की आपत्तियों का निस्तारण कर आगे की कार्रवाई अमल में लायी जाएगी।

उप वन संरक्षक केदारनाथ वन प्रभाग चमोली रजत सुमन ने कहा कि,सडक को लेकर कुछ बिन्दुओं पर आपत्ति है,जिनमें सुधार को लेकर लोक निर्माण विभाग खंड गैरसैंण को पत्र भेजा गया है,जिसके बाद एक माह के भीतर दोबारा से संयुक्त निरीक्षण की कार्यवाही की जाएगी।

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