ऑनलाइन खरीदारी और स्कूलों,आंगनबाडियों में ठेकेदारी व्यवस्था से व्यापारियों पर दोहरी मार।
ठेकेदारी प्रथा बंद करने की मुख्यमंत्री से मांग
खरीददार बनता पहाड अर्थव्यवस्था पर पड रही मार।
मेहलचौरी (गैरसैंण):-10 अक्टूबर 2026
रिपोर्ट:- प्रेम संगेला
पर्वतीय क्षेत्रों में पहले ही स्वरोजगार के सीमित अवसरों के चलते लोगों को आजीविका चलाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में छोटा-मोटा कारोबार कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले व्यापारियों पर एक तरफ बढती ऑनलाइन खरीदारी तो वहीं दूसरी तरफ सरकारी शैक्षणिक संस्थानों व आंगनबाड़ियों में स्टेशनरी,खाद्य व अन्य सामग्री की आपूर्ति ठेकेदारी प्रथा के तहत किए जाने से दोहरी मार पड़ रही है।
इस समस्या को लेकर व्यापार संघ मेहलचौरी और माईथान के अध्यक्षों ने बीते शनिवार को हल्द्वानी में आयोजित व्यापारी समारोह के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष मामला उठाते हुए नीतियों में बदलाव की मांग करते हुए स्थानीय स्तर पर खरीददारी को बढ़ावा देने की मांग की।
उल्लेखनीय है की पूर्व में आंगनबाडियों और विद्यालयों के लिए खाद्य सामग्री सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीददारी स्थानीय बाजारों से की जाती थी, जिससे स्थानीय स्वरोजगार कर रहे व्यापारियों की आजीविका भी चलती थी। लेकिन वर्तमान में विद्यालयों में कापी ,किताबों के साथ ही एनसीसी में रिफ्रेशमेंट नाश्ता व आंगनबाड़ियों में खाद्य सामग्री की आपूर्ति टेंडर के माध्यम से की जा रही है।वहीं वर्तमान में आनलाईन कारोबार से भी पहाडी क्षेत्रों में व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है, मैदानी क्षेत्रों के व्यापारी जहां आनलाईन से जुडकर कारोबार कर सकते हैं,वहीं पहाडी क्षेत्रों में ऐसी सुविधा न होने से व्यापारी नुकसान उठा रहे हैं। जिससे पहाडों का पैसा यहां की अर्थव्यवस्था में घुमने की बजाय खरीददारी के रूप में बाहर जाने से पहाडों की आर्थिक सेहत पर भी बुरा असर पड रहा है।
स्कूलों में कापी,किताबों,बैग,ड्रैस के वितरण को लेकर मेहलचौरी बाजार के पुस्तक विक्रेता भवान सिंह रावत और गैरसैंण के भैरव दत्त असनोडा हिम्मत फनियाल ने कहा की विद्यालयों में निःशुल्क कापी,किताब देने से स्टेशनरी कारोबार बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। सरकार को विधार्थियों के खाते में धनराशि देकर स्थानीय स्तर पर खरीददारी को बढाना चाहिए। वहीं एनसीसी कैडेटों को हर माह दिया जाने वाला रिफ्रेशमेंट नाश्ता पहले विद्यालयों द्वारा स्थानीय बाजारों से फल और अन्य पौष्टिक खाद्य सामग्री खरीदकर बच्चों को उपलब्ध कराते थे,लेकिन अब ठेकेदारों के माध्यम से पैक्ड खाद्य सामग्री विद्यालयों तक पहुंचाई जा रही है । जिससे स्थानीय व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के साथ ही बच्चों को मजबूरी में पैकड फूड खाना पड रहा है । राशन व्यापारी सुरेशानंद बडोला ने कहा की आंगनबाडियों में सभी खाद्य पदार्थों की आपूर्ति ठेकेदार के माध्यम से की जा रही है,जिससे कारोबर कम हुआ है।
व्यापार संघ गैरसैंण के सुरेंद्र बिष्ट, मेहलचौरी के मोहन सिंह नेगी,आगरचट्टी के विजय सिंह रावत,माईथान के संजय पुंडीर और नाचुलाखाल के बलवंत राणा सहित अन्य व्यापारियों ने सरकार से विद्यालयों और आंगनबाड़ियों में कापी,किताब,ड्रैस जैसी सामग्री के साथ ही खाद्य आपूर्ति को स्थानीय स्तर खरीददारी को बढ़ावा देकर छोटे व्यापारियों की आजीविका सुरक्षित रखने के लिए ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त करने की मांग की है।
