एसआईआर के तहत 105 वर्षीय बुजुर्ग रतन सिंह पुंडीर का बीएलओ ने किया सत्यापन,आजादी से पहले 1921 में जन्मे थे रतन सिंह पुंडीर।
बुजुर्ग बोले जितना मतदान जरूरी ,उतना ही सत्यापन भी आवश्यक।
मेहलचौरी (गैरसैंण)-06 जुलाई 2026
रिपोर्ट:- प्रेम संगेला.
मतदाता सूची में भारत के प्रत्येक नागरिक का सत्यापन किये जाने को लेकर निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के कार्य में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आम नागरिक बड़े उत्साह से भागीदारी कर रहे हैं।
दो दशक बाद शुरू हुए इस महत्वपूर्ण संवैधानिक कार्य को लेकर जहां कुछ अन्य राज्यों में भारी विरोध देखने को मिला था ,वही उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में ग्रामीण स्वयं आगे आकर अपना योगदान दे रहे हैं ।इसी कड़ी में ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के मेहलचौरी निवासी 105 वर्षीय बुजुर्ग का बीएलओ द्वारा घर पर जाकर नामांकन पत्र भरकर निरीक्षण कार्य समपन्न किया गया।
ग्राम पंचायत महलचौरी के सुकेत्यागांव निवासी 105 वर्षीय रतन सिंह पुंडीर पुत्र ख्याली सिंह पुंडीर का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत बीएलओ प्रियंका कुंवर एंव सहयोगी आंगनबाड़ी संचालिका सावित्री रावत द्वारा उनके घर पर जाकर फार्म में आवश्यक जानकारियां भरी गई,जिसके अनुसार रतन सिंह पुंडीर का जन्म आजादी से पहले सन 1921 में ख्याली सिंह पुंडीर एवं जोमती देवी की इकलौती संतान के रूप में हुआ था। उनके 80 वर्षीय इकलौते बेटे चन्दर सिंह पुंडीर भारतीय सेना के साथ ही एसबीआई बैंक से सेवानिवृति के बाद घर पर ही खेती -किसानी का कार्य करते हैं।
उन्होंने बताया की पिता की उम्र 105 वर्ष होने के बावजूद तीनों वक्त का खाना सामान्य रूप से खा रहे हैं । लाठी के सहारे थोडा बहुत आंगन में ही टहलकर शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की भी कोशिश करते हैं । पिछले दो सालों से आंखों की रोशनी कम होने ओर सुनाई देने में समस्या के चलते अब बाजार नहीं जा पाते। अपनी लंबी उम्र के बावजूद कभी किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित नहीं रहे। भादो के महीने में जन्मे 105 वर्ष पूर्ण कर चुके रतन सिंह पुंडीर अपनी शतायु जीवन शैली को लेकर बताते हैं ,की जीवन में हमेशा मौसम के अनुरूप भोजन के नियम का पालन किया,जिसमें अधिकांशत: अपने खेतों में उगाया जाने वाला मोटा अनाज व घर के बाडों में उगाए जाने वाली सब्जीयां आज भी भोजन का मुख्य हिस्सा हैं। नित्य प्रात: 4 बजे जागने वाले ओर धूम्रपान से दूर रहने वाले बुजुर्ग अपना अनुभव साझा करते हुए कहते हैं, कि उनका दौर बेहद गरीबी भर रहा था, जिसमें कई बार भूखे पेट भी रहना पड़ता था। इसके विपरीत आजकल के युवाओं को सभी चीजें आसानी से उपलब्ध तो हो रही हैं,लेकिन अनियमित जीवन शैली के साथ ही बाजार का खानपान तमाम बीमारियों का कारण बन रहा है। विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर जब उनसे बात की गई तो उन्होंने कहा कि देश में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को मताधिकार करना चाहिए,उसके लिए सही नागरिक का सत्यापन भी होना जरूरी है।
