सिस्टम की नाकामी -बुढे बैल के मालिक तक नहीं पंहुच पाई पुलिस ओर राजस्व पुलिस।
एक माह से सड़क किनारे रह रहे बैल को नये साल पर गौशाला में मिली जगह।
मेहलचौरी (गैरसैंण)- 01 जनवरी 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला
एक तरफ सरकार डिजिटल होने के साथ ही एक क्लिक पर समस्याओं के समाधान का दावा तो करती नजर आती है,लेकिन ऐनवक्त पर जब समस्या सामने आती हो तो,सरकार का सारा सिस्टम धरा का धरा रह जाता है।ऐसा ही एक वाक्या लावारिस छोड़ गये बुढे बैल के मामले में देखने को मिला है,जिसमें पूरा सिस्टम एक लावारिश छोडे गये बैल के मालिक तक नहीं पहुंच पाया तब कुनीगाड के कल्याणा में संचालित गौरी गोविंद गौशाला ने नए साल पर नंदी बैल को अपनी गौशाला में ठौर देकर मानवता के कर्तव्य को निभाया।
विकासखंड गैरसैंण के मेहलचोरी में पिछले एक माह से लावारिश छोडे गये बुढ्ढे बैल ने कड़ाके की ठंड के बीच सडक किनारे खुले आसमान के नीचे ही अपना आशियाना बनाया हुआ था। बुढे बैल को कड़ाके ठंड में रहता देख स्थानीय लोगों द्वारा पहले पशुपालन विभाग,रिपोर्टिंग पुलिस चौकी मेहलचोरी व तहसील प्रशासन गैरसैंण को मय नाम पता इसकी सूचना देकर मालिक तक पहुंचाने की गुहार लगाई।बैल के कान पर लगे पशुपालन विभाग के टेग के अनुसार मवेशी के मालिक का पता तारूली देवी ग्राम कलियालिंगुडा,विकासखंड स्यालदे,जनपद अल्मोड़ा का पाया गया,लेकिन कोई भी प्रशासनिक इकाई इसके मालिक तक नहीं पहुंच पाई। तब उत्तराखंड अपडेट की टीम द्वारा 22 दिसंबर को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में इसकी शिकायत दर्ज करवाई गई। लेकिन वहां भी मामले में ढाक के तीन पात ही नजर आए.शिकायत दर्ज करने के चार दिन बाद चार मैसेज भेज कर समस्या के समाधान की बात कह कर इति श्री कर ली गई। इस बीच बैल मोटे पाले के बीच सड़क किनारे रहने को मजबूर था।तब स्थानीय लोगों ने यहां से 10 किलोमीटर दूर कुनीगाड के कल्याणा में कुछ माह पूर्व में स्थापित गौरी गोविंद गौशाला के संचालक सूर्या रावत से संपर्क कर बैल को गौशाला में जगह देने का आग्रह किया।गौशाला में पहले ही 40 लावारिस गोवंश की संख्या ओर जगह की कमी के बाबजूद सूर्या रावत बैल को रखने को तैयार हो गये।ओर गुरुवार को अपने संसाधनों पर ही बैल को गौशाला ले गये।जिस पर व्यापार संघ अध्यक्ष मोहन सिंह नेगी,डॉक्टर अवतार सिंह नेगी,सोनू वीरेंद्र कठैत,दीपक नेगी,राकेश नेगी,सुरेशानंद बडोला,सुरेंद्र पंवार,जवाहर सिंह आदि ने गौशाला संचालकों का आभार व्यक्त किया।
