चारधाम हेली बुकिंग फ्रॉड में शामिल साइबर गिरोह के दो आरोपीयों को एसटीएफ ने किया अरेस्ट।

चारधाम हेली बुकिंग फ्रॉड में शामिल साइबर गिरोह के दो आरोपीयों को एसटीएफ ने किया अरेस्ट।

देहरादून:- 30 मई 2026

उत्तराखंड एसटीएफ ने चारधाम हेली बुकिंग फ्रॉड में शामिल साइबर गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया. दोनों सदस्यों की गिरफ्तारी बिहार से की गई है। गिरफ्तार आरोपियों से कई बैंकों में अकाउंट, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, डिजिटल सबूत समेत महत्वपूर्ण बरामदगी की गई। साथ ही एनसीआरपी (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) शिकायतों से लिंक पूरे भारतवर्ष में लाखों की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है।

उत्तराखंड एसटीएफ को सूचना मिली कि एक संगठित साइबर गिरोह फर्जी फेसबुक,व्हाट्सअप नंबर और बैंक खातों के माध्यम से श्रद्धालुओं को ‘हेली सेवा बुकिंग’ के नाम पर ठग रहा है. जिसके संबंध में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून में सीसीपीएस (साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन) में नियुक्त सब इंस्पेक्टर राजीव सेमवाल द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया था।

मुकदमे की जांच के दौरान एसटीएफ टीम ने डिजिटल सबूतों, बैंकिंग ट्रेल और मोबाइल डाटा के आधार पर बिहार में अभियान चलाया,जिसमें एसटीएफ की टीम ने बिहार के नालंदा से 2 मुख्य साइबर आरोपी दीपक कुमार और विजित कुमार को गिरफ्तार किया।

जांच के दौरान उत्तराखंड एसटीएफ की टीम थाना साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन नालंदा, बिहार के संपर्क में थी और I4C इंडियन क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, गृह मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा भी हेली धोखाधड़ी से संबंधित कुछ साइबर अपराधियों का डेटा टीम को उपलब्ध कराया गया था। जिसमें टीम द्वारा नालंदा से एक अन्य साइबर आरोपी शिव कुमार पासवान उर्फ फुलटून निवासी नालंदा, बिहार को गिरफ्तार किया गया। जिसके खिलाफ मुकदमा नालंदा, बिहार में ही दर्ज किया गया। साथ ही पूछताछ के दौरान आरोपी ने उत्तराखंड में संचालित हेली सेवा में भी धोखाधड़ी किए जाने की बात कबूली. जिस संबंध में टीम ने आरोपी के खिलाफ बी-वारंट प्राप्त करने के लिए वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

अपराध करने का तरीका:⤵️

आरोपी खुद को अधिकृत हेली सेवा प्रदाता या एजेंट बताकर फर्जी व्हाट्सअप नंबर, फर्जी सोशल मीडिया पेज (फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि) और फर्जी वेबसाइट संचालित करते थे।
सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से श्रद्धालुओं को टारगेट किया जाता था। ‘VIP दर्शन’, ‘तुरंत कंफर्म टिकट’, ‘सीमित सीट’ जैसे झूठे प्रलोभन देकर विश्वास में लिया जाता था। अलग-अलग व्यक्तियों के बैंक खाते खुलवाकर उन्हें म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। ठगी की धनराशि इन खातों में ट्रांसफर कर एटीएम के माध्यम से निकासी की जाती थी। गिरोह के सदस्यों के बीच 15 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक कमीशन का बंटवारा किया जाता था। बिहार में रहते हुए एसटीएफ टीम ने पूछताछ के दौरान कुछ नाबालिग बालकों से भी पूछताछ की गई.पूछताछ के दौरान चारधाम हेली बुकिंग फ्रॉड से संबंधित जानकरियां मिली। प्रथम दृष्टया साइबर अपराधियों ने कुछ नाबालिग बच्चों को साइबर धोखाधड़ी में शामिल किया जा रहा है।पूछताछ में जानकारी मिली कि साइबर अपराधियों ने धोखाधड़ी करने के लिए अनजान व्यक्तियों के मोबाइल हॉटस्पॉट/इंटरनेट कनेक्शन का भी उपयोग किया जाता है। गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े बैंक खातों पर कई शिकायतें नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल में दर्ज पाई गईं। व्हाट्सएप चैट्स में अन्य सहयोगियों के साथ बैंक खातों, एटीएम कार्ड और क्यूआर कोर्ड के आदान-प्रदान के सबूत मिले हैं। गिरोह का नेटवर्क बहु-राज्य (Multi-State) स्तर पर सक्रिय पाया गया।

एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने बताया है कि, अन्य फरार आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी है. साथ ही राज्य एसटीएफ की एंटी हेली फ्रॉड सेल ने अब तक 300 फर्जी सोशल मीडिया लिंक, (फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम अकाउंट) और 100 से अधिक संदिग्ध व्हाट्सएप नंबरों पर प्रभावी कार्रवाई कर ब्लॉक कराया गया है।

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