अयोध्या राम मंदिर दान चोरी के बाद बदरीनाथ धाम से भी कथित वित्तिय अनियमितता का मामला सामने आया है. BKTC ने दिए जांच के आदेश।
चमोली:-03 जुलाई 2026
अयोध्या में राम मंदिर के बाद चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ धाम में भी श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कर्मचारियों पर दान और चढ़ावे की रकम में हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मंदिर समिति के स्तर से इसकी विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही गाइडलाइन जारी कर दान व चढ़ावे को लेकर सतर्कता बरतने को कहा गया है।वहीं, मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि जांच में यदि कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बताया गया कि भैरव सेना नामक संगठन ने दान-चढ़ावे में हेराफेरी को लेकर एक शिकायती पत्र मंदिर समिति के सीईओ को दिया है,हालांकि, संगठन ने जो आरोप लगाए हैं, उनके पक्ष में कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया है। फिर भी मंदिर समिति की ओर से जांच समिति गठित करने के साथ सीसीटीवी आदि को खंगाला जा रहा है। बदरीनाथ धाम को देश के चारों धाम में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है और देश-विदेश के करोड़ों लोगों की आस्था इससे जुड़ी हुई है,ऐसे में यदि बदरीनाथ मंदिर के भीतर ही चढ़ावे और दान के पैसों में हेराफेरी के आरोप लगते हैं तो यह बेहद चिंताजनक है। यही वजह है कि अयोध्या में दान चोरी प्रकरण के बाद बदरीनाथ व केदारनाथ धाम सहित अन्य मंदिरों की व्यवस्था को देखने वाली समिति भी सर्तक हो गई है।
इसी कड़ी में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ की ओर से जारी आदेश में समिति के अधीनस्थ मंदिर, धर्मशाला, कार्यालयों व खजाने में प्रभारी अधिकारियों को गाइडलाइन जारी कर पारदर्शिता बरतने को कहा गया है.अधिकारियों को विशेष सर्तकता बरतने के साथ निगरानी रखने के लिए भी कहा गया है। साथ ही आगाह किया गया है कि किसी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
बदरीनाथ धाम में दान की राशि गिनने के लिए मंदिर कर्मचारियों के साथ श्रद्धालुओं को भी लगाया जाता है। दान पात्रों में डाली गई राशि को वहां तैनात श्रद्धालुओं व मंदिर कर्मचारियों के सामने खाली किया जाता है। सीसीटीवी व मंदिर के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में होने वाली गिनती के बाद राशि वहीं पर मौजूद बैंक कर्मचारी के सुपुर्द कर दी जाती है। बैंक कर्मचारी इस राशि की दोबारा गिनती कर उसे जमा कराता है।जिन श्रद्धालुओं को स्वच्छा से गितनी में लगाया जाता है, उनका रिकार्ड भी मंदिर समिति के पास मौजूद होता है।यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ हर दूसरे दिन व यात्रियों की संख्या कम होने पर दो से तीन दिन के अंतराल दान राशि या फिर पात्र में डाले गए दान वस्तु की गिनती होती है। धनराशि को गिनती के बाद सीधे बैंक और वस्तुओं को मंदिर समिति के खजाने में जमा किया जाता है।
इस प्रकरण में अब श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति कर्मचारी महासंघ ने भी मोर्चा संभाल लिया है। महासंघ के अध्यक्ष विजेंद्र बिष्ट ने समिति को पत्र लिखकर इस मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने का अनुरोध किया है।उन्होंने कहा कि चढ़ावा, दान सामग्री और अन्य माध्यमों से प्राप्त होने वाली आय में यदि कहीं भी कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी गंभीरता से जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।उनका यह भी कहना है कि जांच में आरोप असत्य या भ्रामक पाए जाने पर ऐसे तत्वों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि इंटरनेट मीडिया में बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे एवं दान में कथित हेराफेरी के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उन्हें गंभीरता से लिया गया है।पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं तथ्यपरक जांच के लिए समिति गठित करने के साथ स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच में यदि कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि इंटरनेट मीडिया में जिस कर्मचारी को उनका निजी सचिव बताया जा रहा है, वह पूरी तरह गलत है। वह मंदिर समिति का नियमित कर्मचारी है और वैयक्तिक सहायक के रूप में पूर्व में भी मंदिर समिति के तीन अध्यक्षों के साथ कार्य कर चुका है।उसके संबंध में प्रसारित किए जा रहे आरोप सही पाए जाते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
