डबल वोटर लिस्ट में नाम होने के बाद भी कई प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा और जीता,मामले में अब कोर्ट हुआ सख्त।
नैनीताल:-20 जुलाई 2026
उत्तराखंड में दोहरी मतदाता सूची के सहारे पंचायत चुनाव लड़ने और जीतने वाले प्रत्याशियों के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सामाजिक कार्यकर्ता शक्ति सिंह बर्थवाल द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब तलब किया है।
अदालत ने आयोग से उन सभी विजयी प्रत्याशियों का ब्यौरा मांगा है, जिन्होंने नगर निकाय और ग्राम पंचायत दोनों की मतदाता सूचियों में नाम दर्ज होने के बावजूद चुनाव जीता और वर्तमान में जनप्रतिनिधि बने हुए हैं। दरअसल, यह पूरा विवाद पिछले वर्ष के पंचायत चुनाव से पहले शुरू हुआ था, जब राज्य निर्वाचन आयोग ने एक स्पष्टीकरण (क्लैरिफिकेशन) जारी कर ऐसे व्यक्तियों को भी चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी थी, जिनके नाम दो अलग-अलग वोटर लिस्ट में थे।
याचिकाकर्ता शक्ति सिंह बर्थवाल ने इस फैसले को कानून के खिलाफ बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिस पर कोर्ट ने आयोग के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद आयोग इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर गया,लेकिन शीर्ष अदालत ने आयोग की विशेष अनुमति याचिका को खारिज करते हुए साफ किया कि हाईकोर्ट का फैसला उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 के कानूनी प्रावधानों के तहत बिल्कुल सही है।
चूंकि अब पंचायत चुनाव संपन्न हो चुके हैं और संबंधित प्रत्याशी चुनकर आ चुके हैं, इसलिए हाईकोर्ट ने मामले के अंतिम निस्तारण के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। ताजा सुनवाई में अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील को निर्देश दिए हैं कि वे यह तय करें कि क्या इन सफल प्रत्याशियों को भी इस मामले में पक्षकार बनाया जाना चाहिए, ताकि सभी प्रभावित पक्षों को सुनने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जा सके। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद का समय नियत किया है।
