चंपावत सामूहिक दुष्कर्म मामले में तीनों दोषियों को 20-20 साल का कठोर की कारावास सजा

चंपावत सामूहिक दुष्कर्म मामले में तीनों दोषियों को 20-20 साल का कठोर की कारावास सजा,75-75 हजार रुपए का जुर्माना भी लगा।

चंपावत:-28 जून 2026

करीब ढाई साल पुराने चंपावत सामूहिक दुष्कर्म मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया है। साथ ही 20-20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है, इसके अलावा न्यायालय ने प्रत्येक दोषी पर 75-75 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

दरअसल, चंपावत के बहुचर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने शनिवार यानी 27 जून को बड़ा फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोषियों को 75-75 हजार रुपए का अर्थदंड भी भरना होगा। अगर कोई दोषी जुर्माना अदा नहीं करता है, तो उसे एक-एक साल की अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी।

क्या था मामला?

अभियोजन के मुताबिक, यह घटना बीती 7 अक्टूबर 2023 की रात की है। जहां चंपावत के एक गांव में एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई थी. जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था। महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म का आरोप तीन युवकों पर लगा था। जिनके खिलाफ पीड़ित महिला ने पुलिस में नामजद तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की थी।

पीड़िता की तहरीर पर चंपावत कोतवाली में सोहन सिंह (उम्र 22 वर्ष), राहुल सिंह (उम्र 25 वर्ष) और बबलू सिंह (उम्र 32 वर्ष) निवासी झालाकुड़ी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस विवेचना पूरी होने के बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट समेत अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुज कुमार संगल ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 डी के तहत तीनों दोषियों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास और प्रत्येक पर 75-75 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया,इसके अलावा सोहन सिंह और राहुल सिंह को IPC की धारा 342 के तहत एक-एक साल के कठोर कारावास की सजा भी सुनाई गई।

न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। वहीं, न्यायालय ने सोहन सिंह और राहुल सिंह को आईपीसी (IPC) की धारा 363 के तहत लगाए गए आरोप से दोषमुक्त कर दिया। नए आपराधिक कानूनों के तहत पुरानी आईपीसी (IPC) की धारा 363 अपहरण के लिए सजा से संबंधित थी। अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137 हो गई है।

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