पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने विधायक अनिल नौटियाल को घेरा,नौकरशाही पर भी लगाए गंभीर आरोप।

भाजपा के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने भाजपा के वर्तमान विधायक अनिल नौटियाल को घेरा,नौकरशाही पर भी लगाए गंभीर आरोप।

पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह नेगी ने वर्तमान विधायक अनिल नोटियाल को बताया कुंभकरण।

गैरसैंण:- 18 अक्टूबर 2026
रिपोर्ट-पुष्कर सिंह रावत.

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के विकास के मुद्दों को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के भीतर मची रार अब खुलकर सामने आ गई है। गढ़वाल मंडल विकास निगम के गेस्ट हाउस में आयोजित एक प्रेस वार्ता में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने कर्णप्रयाग के वर्तमान भाजपा विधायक अनिल नौटियाल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नेगी ने विकास कार्यों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए वर्तमान विधायक की तुलना ‘कुंभकर्ण’ से कर दी और नौकरशाही पर गैरसैंण के विकास में जानबूझकर अड़ंगा लगाने का आरोप मढ़ दिया।

कुंभकर्ण 6 महीने में जागता है,विधायक 5 साल से सोए हैं।

प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी का गुस्सा वर्तमान विधायक अनिल नौटियाल पर जमकर फूटा। उन्होंने कहा कि गैरसैंण विधानसभा और गैरसैंण क्षेत्र की जनता ने जिस उम्मीद के साथ विधायक चुना था, उस पर पानी फिर गया है। सुरेंद्र सिंह नेगी ने आरोप लगाया कि मैंने गैरसैंण के चौमुखी विकास के लिए 5 से 6 प्रमुख मांगें तैयार की थीं,जिन्हें लेकर पिछले पांच वर्षों में विधायक अनिल नौटियाल को लगातार कई पत्र लिखे गए। बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि विधायक ने इन पांच सालों में एक भी पत्र का संज्ञान नहीं लिया और न ही किसी सार्वजनिक मंच या सरकार के सामने इन बुनियादी मांगों को उठाया।

नेगी ने आगे तंज कसते हुए कहा कि,मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कई गैरसैंण दौरे हुए यहाँ विधानसभा सत्र आयोजित हुए और राज्य स्थापना दिवस के बड़े कार्यक्रम भी हुए, लेकिन विधायक ने कभी भी सीएम के सामने गैरसैंण के विकास का खाका नहीं रखा। यहाँ तक कि उन्होंने विधानसभा सत्र के दौरान सदन के पटल पर क्षेत्र की समस्याओं को लेकर एक भी सवाल नहीं पूछा। पौराणिक कथाओं में कुंभकर्ण भी छह महीने में एक बार जाग जाता था, लेकिन हमारे माननीय विधायक पिछले 5 वर्षों से गहरी नींद में सोए हुए हैं।

25 हजार करोड़ की घोषणाओं पर नहीं बढ़ा एक इंच काम

पूर्व विधायक ने वर्ष 2017 के घटनाक्रमों को याद करते हुए कहा कि जब वे विधायक बने थे, तब गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए जी-जान से प्रयास किए गए थे। उस समय मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राजधानी परिक्षेत्र के सुनियोजित विकास के लिए एक विशेष उच्च स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की गई थी। नेगी ने कहा, तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा गैरसैंण राजधानी क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 10 वर्षों के भीतर 25 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का ऐतिहासिक ऐलान किया गया था। इस भारी-भरकम बजट के तहत गैरसैंण में एक विशाल कृत्रिम झील का निर्माण, प्रतिष्ठित भाषा संस्थान की स्थापना और एक अत्याधुनिक मिनी सचिवालय का निर्माण किया जाना तय हुआ था। लेकिन आज हकीकत यह है कि इन बड़ी योजनाओं पर एक इंच भी काम आगे नहीं बढ़ पाया है। यदि सरकार ने हर साल के बजट में इस घोषित राशि का आनुपातिक प्रावधान किया होता, तो आज तक साढ़े 12 हजार करोड़ रुपये गैरसैंण की धरती पर खर्च हो चुके होते और यहाँ की तस्वीर बदल गई होती।

11 वर्षों बाद भी जमीन हस्तांतरण नहीं; 53 करोड़ का प्रोजेक्ट हुआ 80 करोड़ का

प्रेस वार्ता में मिनी सचिवालय के निर्माण को लेकर नोकरशाही पर बड़ा आरोप लगाते हुये। सुरेंद्र सिंह नेगी ने उत्तराखंड की उच्च नौकरशाही (ब्यूरोकेसी) को सीधे आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राज्य के बड़े अधिकारी पहाड़ नहीं चढ़ना चाहते हैं, वे देहरादून के वातानुकूलित कमरों से बाहर नहीं निकलना चाहते, इसलिए जानबूझकर गैरसैंण के प्रोजेक्ट्स को लटकाया जा रहा है।

नेगी ने सूचना के अधिकार (RTI) से मिले दस्तावेजों का हवाला देते हुए खुलासा किया, “साल 2015 में तत्कालीन कांग्रेस शासनकाल के दौरान ही गैरसैंण में मिनी सचिवालय के निर्माण को प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी थी। इसके लिए 53 करोड़ रुपये की भारी धनराशि भी स्वीकृत की गई थी। इतना ही नहीं, भारत सरकार के उपक्रम और निर्माणदायी संस्था ‘वापकोस’ (WAPCOS) को शुरुआती काम के लिए साल 2015 में ही 3 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी जारी कर दी गई थी। मिनी सचिवालय के निर्माण के लिए केवल भूमि का हस्तांतरण होना शेष था, लेकिन बड़े अफसरों की घोर लापरवाही के कारण 11 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक जमीन का ट्रांसफर नहीं हो सका है।”

पूर्व विधायक ने आर्थिक नुकसान की बात उठाते हुए कहा कि अधिकारियों की इस सुस्ती की वजह से जो सचिवालय 11 साल पहले 53 करोड़ रुपये में बनकर तैयार हो जाना था, उसकी निर्माण लागत आज बढ़कर 80 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। यह सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी और राज्य की जनता के साथ बड़ा धोखा है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिस भी आईएएस या विभागीय अधिकारी की लापरवाही के कारण यह प्रोजेक्ट 11 साल से अटका हुआ है, उसके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।भाजपा के भीतर खुलकर सामने आई इस अंतर्कलह और पूर्व विधायक के इन तीखे आरोपों के बाद अब सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

इस दौरान पूर्व प्रमुख जानकी रावत,पूर्व प्रमुख शशी सौंरियाल,ज्येष्ठ प्रमुख लीलाधर जोशी,मनोनीत सभासद पृथ्वी बिष्ट,कुंवर सिंह नेगी,राजेन्द्र साह,गमाली राम,गजेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।

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