प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में हाईकोर्ट सख्त,सचिव स्वास्थ्य को कोर्ट में पेश होने के आदेश।
नैनीताल:-06 अगस्त 2026
प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट का संज्ञान लेकर दायर जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सचिव स्वास्थ्य से 12 अगस्त को कोर्ट में पेश होने को कहा है। इसके अलावा कोर्ट ने यह बताने को कहा है कि राज्य सरकार की ओर से बड़े पैमाने पर डॉक्टरों का ट्रांसफर किया जा रहा है,उनके स्थान पर नए डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए क्या उपाय किए जा रहे है? अपने सुझाव कोर्ट को दें। साथ में कोर्ट ने नैनीताल के सेनेटोरियम हॉस्पिटल को सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल बनाए जाने के लिए पूर्व में दिए गए निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि इसके लिए 250 करोड़ की डीपीआर बनाकर सरकार को भेज दिया है। जो बजट की स्वीकृति को लेकर वित्त विभाग के पास है। बजट की स्वीकृति होने के बाद काम शुरू किया जाएगा। जिस पर कोर्ट ने सरकार से एक हफ्ते में प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है।आज सुनवाई के दौरान न्यायमित्र की तरफ से कहा गया कि राज्य सरकार ने बीते दिनों राजकीय मेडिकल कॉलेज सुशीला तिवारी के 16 वरिष्ठ डॉक्टर और बीडी पांडे जिला अस्पताल से कई वरिष्ठ डॉक्टरों का स्थानांतरण कर दिया है। जिसकी वजह से दोनों अस्पतालों के मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उनकी जगह किसी अन्य डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं की गई। जबकि, दोनों अस्पतालों में रेफर के केस आते हैं, इसलिए उनके स्थानांतरण पर दोबारा विचार किया जाए. स्थानांतरण होता भी है,तो उनकी जगह स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए।जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। डॉक्टरों का स्थानांतरण वहां किया जा रहा है, जो अस्पताल चालू नहीं हैं। जो अस्पताल चालू हैं, उनमें नियुक्ति नहीं की जा रही है।
वहीं दूसरी ओर पिथौरागढ़ जिले में अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट खुले में, नदी, नालों, गड्ढों और नगर पालिका के कूड़े के डिब्बों में डाले जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा है कि कॉमन मेडिकल वेस्ट प्लांट लगाने के लिए जगह का चयन कर कोर्ट को बताएं। इसके अलावा यूकेपीसीबी यानी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जिले के सभी अस्पतालों की जांच करके चार हफ्ते के भीतर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा है। साथ में कोर्ट ने ये भी कहा है कि अस्पताल कर्मचारियों को इसकी ट्रेनिंग कराई जाए।
क्या है मामला?
दरअसल, पिथौरागढ़ निवासी डॉक्टर राजेश पांडे ने नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने कहा है कि पिथौरागढ़ जिले में मेडिकल वेस्ट का निस्तारण के लिए कोई सुविधा नहीं है. ऐसे में सरकारी, निजी अस्पातल और पैथ लैब का मेडिकल वेस्ट इनकी ओर से खुले में या फिर नदी, नालों, गड्ढों या नगर पालिका के कूड़े के डिब्बों में डाला जा रहा है. जिसकी वजह से बीमारी फैलने की आशंका बढ़ रही है।
राजेश पांडे का कहना है कि इस वेस्ट को जानवर भी खा रहे हैं. उनके स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। पिथौरागढ़ जिले में करीब 20 पैथ लैब चल रहे हैं, लेकिन इनका यूकेपीसीबी यानी उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन तक नहीं है।इसकी वजह से पर्यावरण को भी खतरा उत्पन्न हो गया है. अस्पतालों की ओर से नियमों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। यूकेपीसीबी की ओर से अभी तक जिले के दो अस्पताल की जांच की गई है, अन्य की नहीं की. जिस पर कोर्ट ने यूकेपीसी से चार हफ्ते के भीतर रिपोर्ट मांगी है।
