गैरसैंण के नैसर्गिक सौंदर्य और लोक-संस्कृति को समेटे ‘प्यारो गैरसैंण’ गीत ने जीता श्रोताओं का दिल।
गैरसैंण:-12 अक्टूबर 2026
रिपोर्ट-पुष्कर सिंह रावत
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी और पहाड़ों की गोद में बसे खूबसूरत शहर गैरसैंण के प्राकृतिक सौंदर्य तथा समृद्ध लोक-संस्कृति को समर्पित एक नया गढ़वाली गीत “प्यारो गैरसैंण” इन दिनों दर्शकों और श्रोताओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
बीते वर्ष “जै-जै पाथावार नंदा -गैरसैंण गैड़ गों की गंगा” के शीर्षक बोल से रिलीज गीत में विभिन्न स्थानीय धार्मिक स्थलों की स्तुती गीत की सफलता से उत्साहित युवाओं ने एक बार फिर अपनी बेहतर संगीत कला को प्रस्तुत किया है ।
जय मां पाथावार नन्दा म्यूजिक स्टूडियो के बैनर तले रिलीज हुए इस मधुर गीत ने अपनी अनूठी धुन और भावपूर्ण बोलों से हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया है। उत्तराखंड की वादियों के सौंदर्य को संगीत के माध्यम से जीवंत करता यह गीत सोशल मीडिया और संगीत प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है।
इस विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति को तैयार करने में उत्तराखंड के उभरते और अनुभवी कलाकारों ने अपनी कला का बेहतरीन प्रदर्शन किया है। गीत को मुख्य तौर पर संगीतकार व गायक शिवम पंवार,गायक प्रिया पुण्डीर और गायक जगदीश प्रसाद ढोंडियाल (जेपी) द्वारा बेहद लगन के साथ तैयार किया गया है। गीत के बोल और इसका संगीत गैरसैंण के शांत वातावरण, यहां की हरी-भरी वादियों और उत्तराखंड के पारंपरिक जनजीवन को बेहद संजीदगी से बयां करते हैं। श्रोताओं का कहना है कि यह गीत न सिर्फ कानों को सुकून देता है, बल्कि अपनी मिट्टी और जड़ों से जुड़े होने का अहसास भी कराता है।
“प्यारो गैरसैंण” गीत की सफलता के बीच जय मां पाथावार नन्दा म्यूजिक स्टूडियो ने क्षेत्र के युवाओं और लोक-कलाकारों के लिए एक बड़ी और सराहनीय योजना की रूपरेखा तैयार की है। प्रोडक्शन टीम के जगदीश प्रसाद ढोंडियाल ने बताया कि, भविष्य में गैरसैंण में एक आधुनिक संगीत प्रशिक्षण केंद्र खोले जाने की योजना है। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य पहाड़ों की छिपी हुई प्रतिभाओं को निखारना और उन्हें एक सही मंच प्रदान करना है। इस आगामी प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से स्थानीय युवाओं को पारंपरिक उत्तराखंडी वाद्ययंत्रों,जैसे ढोल-दमाऊ, हुड़का,बांसुरी को बजाने और शास्त्रीय व लोक संगीत की बारिकियां सीखने का अवसर मिलेगा।
कला क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि गैरसैंण जैसे पर्वतीय क्षेत्र में इस तरह के केंद्र की स्थापना से न केवल उत्तराखंड की लोक-कला और संस्कृति का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और हुनर के नए रास्ते भी खुलेंगे। कुल मिलाकर, ‘प्यारो गैरसैंण’ गीत सिर्फ एक मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि गैरसैंण को सांस्कृतिक हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रहा है।
“प्यारो गैरसैंण ” वीडियो गीत में जहां गैरसैंण के प्राकृतिक सौंदर्य को दिखाते हुए ऊंची पहाड़ियां,घने जंगलों के साथ ही खेत-खलिहानों ओर पालतु पशुओं का चित्रण किया गया है,वहीं दूधातोली जैसे ऊंचे बुग्याल और देवदार के घने जंगलों के साथ ही रामगंगा नदी ओर झरनों को भी बखूबी शामिल किया गया है। क्षेत्र की नंदा ठौंकी,भैरवगढ़ी मंदिर,घंड़ियाल देवता,भराड़ी देवी के धार्मिक स्थलों के साथ ही हिमालयी पृष्ठभूमि लिए विधानसभा परिसर के विहंगम दृश्य भी शूट किये गये हैं। ड्रोन के माध्यम से गैरसैंण नगर व नजदीकी गांवों की खुबसूरत वादियों के साथ ही दिवालीखाल,मेहलचौरी व खनसर घाटी के विभिन्न गांवों के शामिल मनमोहक दृश्य भी विडियो गीत को आकर्षक बना रहे हैं।
