ग्रामीण की मौत के मामले में ग्रामीण घेरेंगे थाना,जांच में देरी को लेकर मृतक के परिजन भी बैठेंगे भूख हड़ताल पर।

ग्रामीण की मौत के मामले में ग्रामीण घेरेंगे थाना,जांच में देरी को लेकर मृतक के परिजन भी बैठेंगे भूख हड़ताल पर।

माईथान (गैरसैंण):-29 जून 2026
रिपोर्ट-प्रेम संगेला

थाना गैरसैंण के अंतर्गत माईथान चौकी के देवपुरी गांव में ग्रामीण राजेंद्र कंडारी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में जांच में हो रही देरी को लेकर ग्रामीणों ने देवपुरी पंचायत घर में एक बैठक का आयोजन किया। बैठक में माईथान क्षेत्र के 21 ग्राम पंचायतों के त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में पुलिस द्वारा जांच में हो रही देरी से नाराज क्षेत्रवासियों ने 1 जुलाई को गैरसैंण तहसील व थाने के घेराव का निर्णय लिया है। इस मौके पर नाराज ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन के ढीले रवैये पर आक्रोश जताते हुए नारेबिजी भी की।

दरअसल देवपुरी गांव के 42 वर्षीय राजेंद्र सिंह कंडारी का 40 दिनों पूर्व रस्सी से हाथ-पैर बंधा शव नदी में मिला था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि,राजेन्द्र सिंह की बेरहमी से हत्या की गयी है। जिसको लेकर अब ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान कर दिया है। पूर्व में जिलाधिकारी सहित मुख्यमंत्री तक को मामले में त्वरित जांच का आग्रह किये जाने के बावजूद जब हत्या के कारणों ओर हत्यारों का खुलासा नहीं हो सका तो,अब ग्रामीणों का धैर्य भी जवाब दे गया है,जिसको लेकर देवपुरी के पंचायत घर में बुलाई गयी बैठक में खंसर घाटी के सभी 21 ग्राम पंचायतों के प्रधानों सहित 9 क्षेत्र पंचायत सदस्यों व जिला पंचायत सदस्य ने भाग लेकर 1 जुलाई को तहसील व थाने के घेराव का ऐलान किया। जिसके तत्काल बाद आमरण अनशन किए जाने का भी निर्णय लिया गया है।

मामले को लेकर मृतक के परिजनों ने भी भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी है। बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व जिला पंचायत सदस्य अवतार सिंह पुंडीर ने कहा कि जब तक क्षेत्र की कानून व्यवस्था राजस्व विभाग के हवाले थी, तब भी कम साधनों ओर संसाधनों के बावजूद अपराधों का पता लगाने में इतना समय नहीं लगता था,जबकि पुलिस महकमे के पास तमाम अत्याधुनिक संसाधन होने के बावजूद 40 दिन बीतने के बाद भी राजेंद्र कंडारी की मौत के कारणों का पता नहीं लगाया जा सका है,जो ढीली -ढाली कानून व्यवस्था का परिणाम है।

जिला पंचायत सदस्य अनीता रावत ने कहा कि मामले में मुख्यमंत्री सहित पूर्व में जिला पंचायत की बैठक में भी मामला उठाया गया था,लेकिन पुलिस विभाग की जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। ग्राम प्रधान देवपुरी किरण नेगी ने कहा कि हम पिछले एक माह से जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं,लेकिन पुलिस अभी केवल पूछताछ तक ही सीमित है। कहा कि,हत्यारों के खुले घुमने से मृतक के परिवारजनों पर भी मौत का खतरा मंडरा रहा है।

इधर मामले में मौत के मामले की विवेचना कर रहे पुलिस अधिकारी थाना अध्यक्ष गैरसैण मनोज सिरौला ने बताया की मामले में फारेंसिक जांच व बिसरा रिपोर्ट जल्द उपलब्ध करवाए जाने को लेकर पुलिस अधीक्षक से पुर्नआग्रह किया गया है। जिससे जल्द मामले का खुलासा हो सके।

पंचायत भवन में आयोजित बैठक में नैल,देवपुरी ,झूमाखेत, कुसरानी, बच्छुवाबाण ,दीवाधार,सारिंगगांव ,जलचौरा ,कोट ,कलचुंडा,लामबगढ़,नौगांव ,धामदे ,टेटुडा,नैणी ,मालकोट ,कालीमाटी व तेवाखर्क ग्राम पंचायतों के प्रधानगण, क्षेत्र पंचायत सदस्यों के साथ ही भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

क्या था पूरा मामला?

उल्लेखनीय है कि 18 मई को सुबह घर से निकलने के बाद गायब हुए राजेंद्र कंडारी का शव 23 मई को घर के नजदीकी गधेरे में मिला था,तब शव के हाथ ओर पैर बंधे हुए पाये गये थे। मामले की जांच में शुरूआत से ही डॉग स्क्वायड की टीम मौके पर लगाये जाने के साथ ही फॉरेंसिक टीम, फील्ड स्टाफ व एसओजी की टीम को भी लगाया गया था। वहीं पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में भी सर व गर्दन के हिस्सों में चोट के निशान पाए गए थे। लेकिन शव मिलने के बाद महत्वपूर्ण 35 दिन बीतने के बावजूद अब तक मृतक की बिसरा रिपोर्ट भी प्राप्त नहीं हो सकी है। वहीं मौके से मिले मोबाइल ,पानी की बोतल ओर चप्पलों पर संभावित उंगलियों के निशाने का भी पता नहीं चल पाया,जबकि वर्तमान में फॉरेंसिक लैब देहरादून में ही स्थापित है।

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