नैनीताल हाइकोर्ट ने 7 साल के बच्चे के कथित यौन उत्पीड़न और हत्या के मामले में निचली अदालत का फैंसला पलटा,आरोपी की सजा की रद्द।

नैनीताल हाइकोर्ट ने 7 साल के बच्चे के कथित यौन उत्पीड़न और हत्या के मामले में निचली अदालत का फैंसला पलटा,आरोपी की सजा की रद्द।

नैनीताल:-13 अगस्त 2026

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 2013 में 7 वर्षीय मासूम बच्चे की कथित यौन उत्पीड़न व हत्या के मामले में एक फैसला सुनाया है।पीठ ने निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को खारिज करते हुए आरोपी को सभी आरोपों से बरी करने का आदेश दिया है। मामला 23 अगस्त 2013 का है, जब देहरादून जिले के डोईवाला स्थित घर से 7 वर्षीय मासूम अचानक लापता हो गया था। अगले दिन 24 अगस्त को बच्चे का शव अभियुक्त के पारिवारिक परिसर में खड़ी एक कार के भीतर से बरामद हुआ था। पुलिस ने पीड़ित पिता की तहरीर पर हत्या और साक्ष्य मिटाने समेत कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामले की जांच के बाद पुलिस ने एक शख्स को गिरफ्तार कर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद देहरादून की फास्ट ट्रैक कोर्ट/विशेष पॉक्सो जज ने अप्रैल 2018 में आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 302, 377, 201 और पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने इस आपराधिक अपील पर सुनवाई की। बचाव पक्ष की अधिवक्ता ममता बिष्ट ने तर्क दिया कि पूरा मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है और अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है कि अपराध किस प्रकार और किसने किया है। खंडपीठ ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि जिस कार में बच्चे का शव मिला,उसका मालिकाना हक केवल आरोपी के पास ही था। पुलिस जांच के दौरान कार की चाबी आरोपी के पास नहीं, बल्कि परिवार के अन्य सदस्य (मां) के पास थी। इसके अलावा,फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी कार की सीट या कवर पर कोई खून व दुष्कर्म करने का अंश नहीं पाया गया था।

उच्चतम न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि, भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 का लाभ अभियोजन की कमियों को छिपाने के लिए नहीं लिया जा सकता। केवल किसी संयुक्त पारिवारिक परिसर में खड़ी कार से शव मिलने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हत्या आरोपी ने ही की है। सभी तथ्यों, गवाहों के बयानों और साक्ष्यों का गहन अध्ययन करने के बाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के 2018 के सजा के आदेश को रद्द कर दिया है। पीठ ने आरोपी अमित कौशल को सभी आरोपों से मुक्त करते हुए तुरंत जेल से रिहा करने के आदेश जारी किए हैं, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो।

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